विकीलीक्स के परमाणु धमाके से संसद में लगी आग

नई दिल्ली | विकीलीक्स के परमाणु संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कांग्रेस द्वारा सांसदों की खरीद-फरोख्त का खुलासा किये जाने के बाद भारत की राजनीति में उबाल आ गया है। भारतीय अमेरिकी परमाणु विधेयक संसद में साल 2008 में बेहद नाटकीय तरीके से पास हुआ था। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने पहले भी सांसदों की खरीद के मुद्दे को लोकसभा में उठाया था। विकीलीक्स के खुलासे के बाद तो भाजपा पूरी तरह केंद्र सरकार के विरोध में उतर आई है। संसद के दोनों सदन गुरुवार को इस बहस में उलझे हैं कि कांग्रेस ने सांसदों को खरीदने की पेशकश की या नहीं।

लोकसभा

लोकसभा में कांग्रेस के धूल चटाने की जिम्मेदारी भाजपा के उग्र तेवर वाली महिला नेता सुषमा स्वराज ने संभाली। सुषमा स्वराज ने सदन में परमाणु विधेयक को पारित कराए जाने को खुली बेइमानी करार दिया। उन्होने कहाकि विकीलीक्स खुलासे से ये बात जगजाहिर हो गई कि कांग्रेस ने अमेरिका के दबाववश इस विधेयक को पारितकराने के लिए सांसद खरीदे और उनकी बोली लगाई। संसद में वाम दल भी बाजपा की मांगों से सौ फीसदी सहमत दिखे।

उल्लेखनीय है कि परमाणु विधेयक पारित होने पर भारत में दो ही बड़ी अड़चनें केंद्र सरकार के सामने पेश आ रही थीं। कांग्रेस का माकपा से गठबंधन भी इसी विधेयक को लेकर टूटा था। खुलासे के मुताबिक, कांग्रेस ने भाजपा के कुछ सांसदों को बड़ी कीमत लगा कर खरीदा और लोकसभा में परमाणु विधेयक पारित करकर ही दम लिया था।

राज्यसभा

राज्यसभा में कांग्रेस को सबक सिखाने की जिम्मेदारी प्रतिपक्ष नेता अरुण जेटली ने बखूबी संभाली। जेटली ने सदन में केंद्र सरकार की बखिया उधेड़ दी। कांग्रेस नेता और कैबिनेट वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी जेटली के आरोपों का जवाब देते रहे और आखिरकार बेहद आगबबूला हो गए। राज्यसभा के कार्यकारी अध्यक्ष ने आखिरकार सदन को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया।

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