सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में 'रखैल' शब्द को जायज बताया
गौरतलब है कि दिसंबर 2010 में महिला दक्षता समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील में कोर्ट से 'कीप' (रखैल), 'वन नाइट स्टैंड' और 'सर्वेंट' (जैसे शब्दों को टिप्पणियों से हटाने की मांग की थी। संगठन की दलील थी कि इस तरह के शब्द महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक हैं।
आपको बता दें देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक 21 अक्तूबर एक फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि अगर कोई महिला किसी पुरूष के साथ एक रात व्यतीत करती हौ उसके बाद अगर वो व्यक्ति उस महिला के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करता है तो सिर्फ इस आधार पर वो उस व्यक्ति से मुआवजे की मांग नहीं कर सकती है। क्योंकि मुआवजा केवल पत्नी को मिल सकता है, और कोर्ट की नजर में स्त्री-पुरूष का ये संबध वैवाहिक नहीं है। उस समय कोर्ट के फैसले में कीप शब्द का प्रयोग किया गया था।
न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की पीठ ने महिला दक्षता समिति की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि संगठन को फैसले पर सवाल उठाने का कोई कानूनी हक नहीं और वह उस वैवाहिक मामले में पक्ष नहीं थी जिसपर यह फैसला दिया गया। देश की एकमात्र महिला अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह और समिति की उपाध्यक्ष विनय भारद्वाज ने'अपमानजनक टिप्पणी"को हटाने से उच्चतम न्यायालय के इंकार करने पर निराशा प्रकट की है।













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