आरक्षण आंदोलन: रामायण स्‍टेशन बना 'जाट नगर रेलवे स्‍टेशन'

हिसार। हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश के जाटों को अन्‍य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत केंद्रीय सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में शिरकत कर रहे करीब डेढ़ लाख लोग इस बार पीछे हटने वाले नहीं। केंद्र सरकार ने तीन दिन का समय मांगा, जिसके बदले में जाटों ने चार दिन का समय दिया है, लेकिन रेलवे ट्रैक पर वे अभी भी जमे हुए हैं। हरियाणा और यूपी से राजधानी की ओर जाने वाले कई रेलवे रूटों का मंजर एकदम बदला हुआ है। आलम यह है कि यहां के आंदोलनकारियों ने रामायण स्‍टेशन का नाम बदलकर 'जाट नगर रेलवे स्‍टेशन' कर दिया है।

ट्रेन की पटरियों पर दिन-रात काट रहे जाटों ने हिसार-दिल्‍ली रूट पर पड़ने वाले रामायण स्‍टेशन पर 'जाट नगर रेलवे स्‍टेशन' का नाम बैनर लगा दिया है। जब तक यह स्‍टेशन जाट नगर बना रहेगा, यहां से कोई ट्रेन नहीं गुजरेगी, क्‍योंकि स्‍टेशन पर पंद्रह हजार से ज्‍यादा लोगों का कब्‍जा है। लोग दिन रात रेलवे लाइन पर बिता रहे हैं। लोग घरों से चादर, तकिया, कंबल बैगों में कपड़े लेकर रेलवे लाइन पर पहुंच गये हैं। टाइम पास करने के लिए लोग ताश की गड्डियां फेंट रहे हैं, लूडो और शतरंज खेल रहे हैं। साथ में हुक्‍के लगा दिए गए हैं, जिसकी जब मर्जी आये हुक्‍के का मज़ा ले।

रेलवे ट्रैक पर ही मनेगी होली

बच्‍चे रेलवे लाइन के आस-पास मैदानों में दिन भर क्रिकेट और फुटबॉल खेलते हैं। यहां तक महिलाएं भी अपना बोरिया-बिस्‍तर बांध कर रेलवे लाइन पर पहुंच गई हैं। ये महिलाएं परिजनों के लिए भोजन भी रेलवे ट्रैक पर ही पका रही हैं। सभी प्रदर्शनकारी सामूहिक रूप से भेजन करते हैं और फिर रात में यहां लोक-गीत 'रागिनी' गाये जाते हैं। समय काटने के लिए कई लोग नृत्‍य तक करते हैं।

ट्रैक पर बैठे जाटों ने कह दिया है कि अब उनकी होली भी रेलवे लाइन पर ही मनेगी। वे होली पर अपने घर नहीं जायेंगे। अखिल भारतीय जाट आरक्षण आंदोलन समिति के अध्‍यक्ष हवा सिंह सांगवान ने साफ कह दिया है कि वे इस बार होली घर पर नहीं मनायेंगे। आलम यह है कि अगर जाटों को पांच-छह महीनों तक भी यहां बैठना पड़ा तो वे बैठे रहेंगे। ऐसा ही आलम सिर्फ एक स्‍टेशन पर नहीं, बल्कि मुरादाबाद-दिल्‍ली, हिसार-लुधियाना, दिल्‍ली-भिवानी आदि कई रेलवे रूटों पर है।

लुधियाना से वाराणसी तक रेल यातायात प्रभावित

बात अगर ट्रेनों की करें तो दिल्‍ली से लखनऊ, दिल्‍ली-लुधियाना, दिल्‍ली-हिसार, दिल्‍ली-भिवानी आदि कई रूटों पर करीब 60 ट्रेनें रद्द की जा चुकी हैं। रद्द हुई ट्रेनों में करीब दो दर्जन एक्‍सप्रेस ट्रेनें हैं, बाकी की पैसेंजर और लोकल। यही नहीं 30 से ज्‍यादा ट्रेनों के रूट में परिवर्तन किया गया है। इस कारण रेलवे को रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है।

इस आंदोलन से सिर्फ दिल्‍ली से हिसार या दिल्‍ली से मुरादाबाद तक का रेल यातायात नहीं प्रभावित है, बल्कि दिल्‍ली से वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबादइ, कानपुर, बरेली, या दिल्‍ली से पंजाब के बड़े शहरों तक जाने वाली प्रमुख ट्रेनें भी नहीं चल रही हैं, जिस वजह से यात्रियों को भारी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं जिन ट्रेनों के रूट में फेरबदल किया गया है, उनमें स्‍लीपर, एसी और जनरल सभी बोगियां खचा-खच भरी दिख रही हैं।

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