जापान के परमाणु संयंत्र पर डाला जा रहा है समंदर का पानी
इतने बड़े परमाणु संयंत्र को ठंडा करने के लिए जापान में इतना सारा पानी कहां से आएगा तो इसका सीधा रास्ता है समंदर। शाहद यही सोच कर कभी इन विशाल न्यूक्लियर रिएक्टर्स की स्थापना इन तटीय इलाकों में की गई थी। एक जापानी एयरक्राफ्ट इस समय समंदर से पानी ढो-ढो कर इस परमाणु संयंत्र में डाल रहा है। इससे एक ओर आग और धमाकों से तपते रिएक्टर्स को ठंडा रखने की कोशिश की जा रही हैं वहीं दूसरी ओर प्रशीतकों की पॉवर सप्लाई शुरू करने के दूसरे रास्ते ढूंढे जा रहे हैं।
रिएक्टर्स की सही स्थिति इस समय किसी को नहीं पता क्योंकि इनके पास कोई भी नहीं जा सकता। सारी जानकारी कंट्रोल रूम में लगे कैमरों द्वारा जुटाई जा रही हैं। उधर अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह से परमाणु संयंत्रों की आग बुझाने की कोशिश करने से रेडियोएक्टिव पदार्थों के अधिक तेजी से फैलने का खतरा है क्योंकि जिस पूल के माध्यम से ये पानी रिएक्टर्स तक पहुंचाया जा रहा है उनमें रेडियोएक्टिव पदार्थों की छड़े पिघलकर पदार्थ उनके अंदर जमा हो चुका है। अब पानी के माध्यम से रिएक्टर्स के अंदर रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
जापान में आए भूकंप और सुनामी ने दुनिया भर में स्थापित किए जा रहे परमाणु संयंत्रों के सुरक्षा तंत्र और दावों की पोल खोल दी है। मानव जाति की ऊर्जा से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु संयंत्र कितने जरूरी है, वरदान हैं वगैरह-वगैरह हम सभी ने हाल ही में भारत में पास 123 न्यूक्लियर समझौते के दौरान खूब सुना था। जापान की हालत देख तक हर पल यही लग रहा है कि अगर ये आपदा कहीं भारत में आई होती तो क्या होता? हालांकि हमारे सरकारी दावे आज भी जारी हैं कि भारतीय परमाणु संयंत्र जापान के मुकाबले कितने अधिक सुरक्षित हैं, लेकिन इन दावों की सच्चाई हम सभी जानते हैं।













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