जापान में करीब आ पहुंची परमाणु प्रलय की घड़ी
फुकुशीमा के आस-पास रेडियोएक्टिव विकिरण का स्तर 6 पर पहुंच चुका है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी ने अब तक परमाणु संबंधित हादसों में फैले रेडियोएक्टिव विकिरण का अधिकतम स्तर 7 नापा है और जापान उस स्तर तक पहुंचने में बस एक कदम दूर है। हर सांस के साथ जापान में रह रहे लोगों के जीने की आस कम होती जा रही है। जापान के आपदा प्रभावित इलाकों में मानो समय ठहर सा गया है।
रेडियोएक्टिव पदार्थ परमाणु संयंत्र से बाहर आकर पूरे शहर में फैल रहा है। इसलिए प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों के बचने के आसार धीरे-धीरे कम से कम होते जा रहे हैं। जो जिंदा बचे हैं उन्हे पीने के पानी और खाना मुहैया नहीं है। देश में एक लाख जवान बचाव कार्यों में जुटे हैं लेकिन एक जिंदा आदमी को ढूंढने में उन्हे लाशों के शहर पार करने पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके बचाव कार्य के सकारात्मक परिणाम बेहद कम मिल रहे हैं।
बचाव दस्ते जिंदा लोगों को ढूंढने में खोजी कुत्तों की मदद ले रहे हैं। लेकिन उससे भी खास मदद नहीं मिल पा रही। लाशों के ढेर लगे हैं ऐसी स्थिति में अब महामारी फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसलिए प्रशासन बिना किसी शिनाख्त के लाशों को दफनाने पर मजबूर है। लोग अब भी अपने रिश्तेदारों को खोज रहे हैं। जापान में रह रहे दूसरे देशों के निवासियों को उन रे देश वालों ने वापस बुलाना शुरू कर दिया है, यहां तक कि राजनयिक और अन्य लोग भी अब जापान जल्द से जल्द छोड़ देना चाहते हैं क्योंकि वहां परमाणु संयंत्र फटने का खतरा बढ़ता जा रहा है।













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