जापान: फुकुशीमा रिएक्टर नंबर 2 का कूलिंग सिस्टम फटा
फुकुशीमा प्लांट के रिएक्टर नंबर 1 और 3 में पहले ही धमाके हो चुके हैं। कल तक ये बहस जारी थी कि क्या परमाणु संयंत्रों को ठंडा करने के लिए प्रशीतक के रूप में समुद्र के पानी का इस्तेमाल किया जाय या नहीं। अमेरिकी विशेषज्ञों ने जापान को सावधान किया था कि समुद्री पानी के इस्तेमाल से महामरी फैलने का खतरा हो सकता है। या फिर रेडिएशन के गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। समुद्री पानी में निहित तत्व और रेडियोएक्टिव पदार्थ परस्पर संपर्क में आकर रिएक्शंस द्वारा कई हानिकारक पदार्थों और यौगिकों को ज न्म दे सकते हैं।
लेकिन जापान के पास फिलहा सोचने का समय नहीं है। जापान में साफ पानी की बेहद कमी हो गई है जिसके चलते जापानी अधिकारी समुद्र के पानी का प्रशीतक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि समुद्र के पानी को सीधे प्रशीतक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा बल्कि इसमें काफी मात्रा में बोरॉन मिला कर इस्तेमाल किया जा रहा है। सका प्रयोग कितना असरदार होगा, ये कहना अभी मुश्किल है। फिलहाल रिएक्टर 2 का कूलिंग सिस्टम फटने से जापान में फिर अफरा-तफरी है।













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