तेंतीस साल बाद पाँच करोड़ रुपये का मुआवज़ा

तेंतीस साल बाद पाँच करोड़ रुपये का मुआवज़ा
स्विमिंग पूल में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पर्यटक विकास निगम यानी आईटीडीसी को लापरवाही का दोषी ठहराते हुए एक ऑस्ट्रेलियाई महिला सूज़न ली बीयर को लगभग पाँच करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है.

तैराकी की शौक़ीन सूज़न को अब से 33 साल पहले अपने परिवार के साथ दिल्ली में छुट्टी मनाने के दौरान एक फ़ाइव स्टार होटल के स्विमिंग पूल में उतरना इतना महंगा पड़ा कि वह ज़िंदगी भर के लिए लोगों पर निर्भर हो गई. आईटीडीसी के अकबर होटल में मई, 1978 में सत्रह वर्षीया सूज़न ने स्विमिंग पूल में छलांग लगाई. तल में काई जमी होने से उसका पैर फिसला और उसके सिर पर गहरी चोट आई.

सूज़न को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन उसकी हालत बिगड़ चुकी थी. होश आने पर पता चला कि सूज़न का कमर से नीचे का धड़ बेजान हो चुका था और उसकी ज़िंदगी एक व्हील चेयर तक सिमट गई. क्वींसलैंड वॉटर पोलो टीम की सदस्या सूज़न को जिस मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा से गुज़रना पड़ा उसका संज्ञान लेते हुए दिल्ली की अदालत ने इसे एक गंभीर घटना माना.

आईटीडीएस ने इस मामले में अपना दोष स्वीकार करने से इनकार करते हुए सूज़न को लापरवाही का ज़िम्मेदार बताया लेकिन अदालत ने यह दलील ठुकरा दी. अदालत ने मुआवज़ा तय करते समय सूज़न के इलाज, उसको ऑस्ट्रेलिया ले जाना, उसका कई वर्ष तक काम न कर पाना और साथ ही उसे आजीवन सहारे की ज़रूरत आदि बातों को ध्यान में रखा.

कोर्ट ने आईटीडीसी को सूज़न को एक करोड़ 82 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है जिसे 1982 से प्रभावी माना जाएगा. यानी उस समय से अब तक इस राशि पर छह प्रतिशत की ब्याज दर से अब यह रक़म चार करोड़ 90 लाख रुपये हो जाती है.

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