लीबिया में घमासान, पश्चिमी देशों ने बढ़ाया दबाव

इन देशों का मकसद है जल्द से जल्द गद्दाफ़ी को अपने ही नागरिकों के खिलाफ़ हिंसा से रोकना. संयुक्त राष्ट्र की ओर से मानवाधिकारों को लेकर जेनेवा में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि 'कर्नल गद्दाफ़ी के जाने का समय अब आ गया है."
विदेश मंत्री ने कहा कि गद्दाफ़ी और उनके सहयोगियों को अपने फ़ैसलों के लिए जवाबदेह होना होगा क्योंकि जो वो कर रहे हैं वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से गलत है और अनुचित भी. उन्होंने कहा, '"लीबिया में प्रदर्शनकारी आज़ादी जैसे बुनियादी हक के लिए एक तानाशाह की गोलियों का सामना कर रहे हैं.'"
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमरीका ने भले ही लीबिया के आसपास के इलाके में नौसैनिक जहाज़ों को नए लिरे से तैनात किया हो लेकिन वह किसी सैन्य कार्रवाई की तैयारी नहीं कर रहा है. फ्रांस ने भी कहा है कि वो सैन्य विकल्पों के बारे में सोच रहा है और ब्रिटेन, लीबिया को 'नो-फ्लाई ज़ोन" घोषित करने पर विचार कर रहा है.
सोमवार को यूरोपीय संघ ने हथियारों के प्रयोग पर पाबंदी के अलावा, संपत्ती ज़ब्त किए जाने और कर्नल गद्दाफ़ी सहित लीबिया के प्रशासनिक अधिकारियों की यात्रा पर रोक लगाने की घोषणा की. मिसराता शहर में सोमवार को सरकार के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ. यह इलाक़ा राजधानी त्रिपोली के पूर्वी हिस्से में है और उससे लगभग 200 किलोमीटर दूर है.
खबरों के मुताबिक मिसराता शहर पर विरोधियों ने कब्ज़ा जमा लिया है लेकिन शहर के आसपास के इलाके और सैन्य थिकाने अब भी कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थकों के कब्ज़े में हैं. एक स्थानीय डॉक्टर ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा प्रदर्शनकारियों ने कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थकों के हमलों का डटकर सामना किया.
कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि 'लीबिया के लोग उनसे बहुत प्यार करते हैं एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने रेजियो स्टेशन पर हमला करने वाले एक विमान को भी मार गिराया.
ग़ौरतलब है कि हर घंटे लगभग एक हज़ार लोग लीबिया को छोड़कर सीमा से सटे ट्यूनिशिया में पहुंच रहे हैं. सोमवार को भी कई हज़ार अप्रवासियों और बांग्लादेश जैसे कई देशों से आए विदेशी मज़दूरों ने ट्यूनिशिया में शरण ली थी. इनमें से ज़्यादातर लोग मिस्र के हैं.
इन लोगों को हवाई और समुद्र मार्ग से निकालने की योजना बनाई जा रही है. हालांकि सीमा पर मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक भारी संख्या में लगातार ट्यूनिशिया पहुंच रहे लोगों की मदद के लिए बड़े स्तर प्रयास करने होंगे. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में लगभग एक लाख लोग लीबिया को छोड़ चुके हैं.
इस बीच बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि 'लीबिया के लोग उनसे प्यार करते हैं और उनके ख़िलाफ़ कहीं कोई प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं. उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शनकारी चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा की ओर से दी जा रही नशीली दवाओं के जोश में यह सब कर रहे हैं.'












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