रेल बजट: भारतीय रेल तंत्र के विस्तार के लिए पैसे की कमी मुख्य चिंता
बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था 8-9 प्रतिशत की दर से विकास कर रही है इसलिए रेलवे में भी तेज विकास की जरूरत है। जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में मालढुलाई 2 करोड़ टन घटकर 92.4 करोड़ टन होने का अनुमान है।
इसके अलावा अगले वित्त वर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि के साथ 99.3 करोड़ टन मालढुलाई का अनुमान लगाया गया है। अगले साल यात्रियों की संख्या में भी केवल 6.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है। इसके चलते आंतरिक स्रोत्रों से पैसा जुटाने की क्षमता पर सवाल पैदा होते हैं।
डेलायट के वरिष्ठ निदेशक विश्वास उदगिरकर ने कहा, "रेल बजट में की गई घोषणाएं स्वागतयोग्य हैं लेकिन इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के परिणाम के बारे में अटकलें लगाए जाने की काफी संभावना है।"
उन्होंने कहा, "क्योंकि इस बजट में मालढुलाई कॉरिडोर जैसी पहले शुरू की गई बड़ी परियोजनाओं की प्रगति के बारे में कुछ नहीं कहा गया है और पैसा जुटाने और इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं दिया गया है।"
रेल मंत्री ने बजटीय सहायता के जरिए 20,000 करोड़, डीजल उपकर के जरिए 1,041 करोड़, आंतरिक स्रोतों से 14,219 करोड़ और बाजार उधारी से 20,594 करोड़ रुपये जुटाकर कुल 57,630 करोड़ रुपये के निवेश की योजना प्रस्तुत की है।
लेकिन सवाल यह है कि हर साल 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये की रकम जुटाने वाला भारतीय रेल वित्त निगम एक साल में इस रकम को दोगुना कैसे करेगा?
रेल मंत्री ने भी यह स्वीकार किया है कि पैसे जुटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुझे इस सदन को यह बताने में कोई संकोच नहीं है कि भारतीय रेलवे मुश्किल चरण से गुजर रहा है।
एसोसिएडेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि तंत्र के विस्तार और नए कोच और लोकोमोटिव संयंत्रों के निर्माण के लिए पैसा कहां से जुटाया जाएगा।"
रेलवे के संचालन अनुपात (आय और खर्च का अनुपात) कोई महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद नहीं है। संचालन अनुपात 92.1 प्रतिशत रहा है और वर्ष 2011-12 में यह अनुपात 91.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वर्ष 2007-08 में संचालन अनुपात 75.9 प्रतिशत रहा था इसके अगले साल यह बढ़कर 88.3 प्रतिशत हो गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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