कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंसे बाबा रामदेव!
नई दिल्ली। योग गुरु बाबा रामदेव जो दो सप्ताह पहले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियान शुरू करने का दावा कर रहे थे, आज कांग्रेस पार्टी के चक्रव्यू में फंस गए हैं। हर जगह इस समय कांग्रेस, बाबा और राजनीति की चर्चा है। एक तरफ बाबा पर छीटाकशी और दूसरी तरफ लोगों का समर्थन। इसकी शुरुआत कहां से हुई किसी को नहीं पता। बाबा रामदेव की प्रेस कान्फ्रेंस से शुरू हुई इस कड़ी से अब कई और कडि़यां जुड़ गई हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी भी शामिल हो गई है।
इस पूरे प्रकरण के कई पहलु दिखाई दे रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा और अहम पहलु कांग्रेस का चक्रव्यू है जो ऊपर से नहीं दिखाई दे रहा है। यह बात तो तय है कि बाबा रामदेव के करोड़ों अनुयायी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हैं। अगर रामदेव राजनीति में आते हैं तो उनके वोटबैंक में गांव के गरीब किसान या मजदूर नहीं, बल्कि वो वर्ग है, जो किसी के बहकावे में वोट नहीं देते। दूसरी अहम बात बाबा का भगवा चोला, जो उन्हें भारतीय जनता पार्टी व सहयोगी दलों से जोड़ने में तनिक देर नहीं लगाएगा।
कुल मिलाकर अगर बाबा और भाजपा मिल जाएं, तो कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंक सकते हैं और यही डर कांग्रेस के मन में बैठ गया है। कांग्रेस खेमे में कितने कलमाड़ी और राजा हैं, यह तो कहना मुश्किल होगा, लेकिन अगर बाबा का पिटारा खुला तो कई भ्रष्टनेताओं के काले चिठ्ठे उजागर हो सकते हैं। चूंकि कांग्रेस सत्ता में है, तो उसे भ्रष्टाचारियों की पोल खुलने का सबसे ज्यादा डर है। अगर भाजपा के किसी नेता की पोल खुलती भी है तो उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला। यही वजह है कि कांग्रेस को बाबा से सबसे ज्यादा खतरा है।
कांग्रेस का चक्रव्यूह
बाबा को उलझाने के लिए कांग्रेस ने चक्रव्यू बहुत ही सोच समझ कर चला है। इसे कांग्रेस की सोची समझी चाल नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे, कि बाबा पर वार करने के लिए उन्होंने दिग्विजय सिंह को ही चुना। राहुल गांधी, सोनिया गांधी क्यों नहीं। उत्तर- विवादों को तूल देना दिग्विजय को अच्छी तरह आता है। खास बात यह है कि दिग्विजय के बयानों पर जब बाबा ने अपने तीर चलाए, तो कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने यहां तक कह डाला कि बाबा राजनीति में नहीं आयें तो उनके लिए अच्छा होगा।
कौन सही है कौन गलत, इसका पता तो बाबा रामदेव के उस बयान से चल जाता है, जिसमें उन्होंने अपनी सारी संपत्ति का ब्योरा दे डाला कि उनके पास एक हजार करोड़ की संपत्ति है। और यह भी कहा कि जिसे जांच करानी हो करा ले। बाबा ने यह भी दावा किया कि उनकी संस्थाओं का हर साल ऑडिट होता है। राजनीतिक गलियारे में शायद ही कोई नेता होगा, जो इतने बेबाक तरीके से अपनी संपत्ति पर बोले।
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