मंदी से पूर्व की विकास दर पर लौटा भारत : विश्व बैंक

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सम्बंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि प्रमुख मुद्रास्फीति की दर मांग बढ़ने के कारण बढ़ी या फिर खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी है। अगर खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति की दर बढ़ी है तो वर्तमान मौद्रिक नीति में उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं है।
दिसम्बर तक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कृषि क्षेत्र में शानदार विकास दर्ज किया गया है जबकि आद्योगिक क्षेत्र में विकास की दर लगातार तीन तिमाहियों तक दोहरे अंक में रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में विकास की दर 8.5 से नौ फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है, जो मंदी के पूर्व की स्थिति के समान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसम्बर में खाद्यान्नों की कीमतों में हुई वृद्धि अस्थाई थी और मार्च 2011 तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर घटकर 7.5 फीसदी होने की सम्भावना थी। भारी व्यापार घाटे के कारण चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा जीडीपी के करीब 3.5 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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