मप्र में भाजपा विधायक को 2 साल की सजा
डेढ़ दशक पहले रमेश सक्सेना सीहोर में केंद्रीय सहकारी बैंक के जिला अध्यक्ष थे। तब उन्होंने 12 लोगों को भवन निर्माण के लिए कर्ज की मंजूरी दी थी। सक्सेना और बैंक के चार अन्य कर्मचारियों पर नियमों को ताक पर रखकर कर्ज मंजूर करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश रश्मि अग्रवाल ने सक्सेना सहित पांच अधिकारियों को नियमों की अनदेखी का दोषी पाते हुए उन्हें दो-दो साल की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के बाद सक्सेना ने कहा कि न्यायाधीश ने उनकी जमानत मंजूर कर उच्च न्यायालय में अपील के लिए उन्हें एक माह का समय दिया है।
सक्सेना के अनुसार यह राजनीतिक साजिश का मामला है। वह बैंक के अध्यक्ष मात्र थे। नियमों के पालन की वास्तविक जिम्मेदारी अधिकारियों पर होती है। उन्हें सिर्फ इसलिए फंसाया गया, क्योंकि उन्होंने 1997 में कांग्रेस छोड़ दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें बैंक के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications