कसाब की मौत की सजा बरकरार (राउंडअप)
न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आर.वी. मोरे की खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कसाब को चारों मामलों में दोषी बताया। अब कसाब के पास इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के लिए 30 दिन का समय है। कसाब के दो कथित भारतीय साथियों को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह जघन्य अपराध है। यदि कसाब को मृत्युदंड नहीं दिया जाता है तो लोगों का न्याय प्रणाली पर से विश्वास उठ जाएगा।"
कसाब 26-29 नवंबर, 2008 के हमले का अकेला जीवित बचा आतंकवादी है। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे। जब फैसला सुनाया जा रहा था उस दौरान कसाब के चेहरे पर बनावटी मुस्कुराहट थी।
विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने इस फैसले को न्याय की जीत करार दिया है। निकम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "यह न्याय की जीत और पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब के नाटक की पराजय है।"
उन्होंने कहा कि कसाब और उसके साथियों द्वारा चलाया गया आतंक का तूफान अंतत: समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले पर कसाब से यह सब करवाने वाले लोगों के बीच हताशा का माहौल होगा।
उन्होंने कसाब के दो भारतीय साथियों फहीम अंसारी और सबाहुद्दीन अहमद को अदालत द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ अपील करने की बात कही।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने घोषणा की है कि राज्य सरकार मामले में सह-आरोपी दो भारतीयों फहीम अंसारी और सबाहुद्दीन अहमद को बरी किए जाने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चेतावनी देगी।
फैसले की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि कसाब की सुनवाई ने भारतीय न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। उन्होंने कसाब की मृत्युदंड की सजा बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया।
चिदम्बरम ने फैसले पर अभियोजन पक्ष को बधाई दी और कहा, "यह हमारी न्याय प्रणाली के लिए श्रद्धांजलि है। हमें हमारी न्याय प्रणाली को किसी मामले से उसी तरह निपटने देना चाहिए जैसे वह अन्य मामलों से निपटती है। हमने जिस तरह से इस मामले को खत्म किया है, उससे भारतीय न्याय प्रणाली की प्रतिष्ठा बढ़ गई है।"
सरकार द्वारा नियुक्त कसाब की वकील फरहाना शाह ने घोषणा की है कि वह उसे मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की सलाह देंगी।
कसाब आर्थर रोड केंद्रीय जेल की अपनी कोठरी से वीडियो-कांफ्रेंसिंग के जरिए सोमवार सुबह 11 बजे के करीब खंडपीठ के सामने उपस्थित हुआ था। इस दौरान वह बड़ा लापरवाह नजर आ रहा था। फैसला सुनने के बाद उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।
उच्च न्यायालय ने कसाब पर उन चारों अभियोगों को बरकरार रखा है जिनके आधार पर सुनवाई अदालत के विशेष न्यायाधीश एम.एल. तहालियानी ने मई 2010 के फैसले में उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इन अभियोगों में मुम्बई के तीन शीर्ष पुलिस अधिकारियों, आतंकवाद निरोधी दस्ते के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे, मुठभेड़ विशेषज्ञ विजय सालस्कर और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे की हत्या का अपराध शामिल है।
मुम्बई के लोगों ने पटाखे फोड़कर और नारे लगाकर इस फैसले का स्वागत किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications