गैर सरकारी संगठन को संयुक्त राष्ट्र से विशेष दर्जा
बांसवाड़ा का यह गैर सरकारी संगठन राज्य में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए काम करता है। इसकी स्थापना 1986-87 में हुई थी। भारत के दो अन्य गैर सरकारी संगठनों को भी संयुक्त राष्ट्र से ऐसा ही विशेष दर्जा मिला है, जिनमें तमिल ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क और सर्व ट्रेन एडुकेट सोसाइटी शामिल है। इन दोनों संगठनों को इस माह की शुरुआत में ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में आर्थिक और सामाजिक परिषद की एक समिति की बैठक में यह सम्मान दिया गया था।
संयुक्त राष्ट्र की इस महत्वपूर्ण ईकाई से विशेष दर्जा मिलने का अर्थ गैर सरकारी संगठनों को संबंधित कार्यक्षेत्र में निपुणता हासिल होने की मान्यता देना है। इसके बाद विभिन्न संगठन संयुक्त राष्ट्र में लिखित बयान और याचिका भी दायर कर सकते हैं।
वाग्धारा राजस्थान के दक्षिणी इलाकों में किसानों, जनजातीय समूह के लोगों, महिलाओं और बच्चों के लिए उनकी क्षमता को देखते हुए अवसर तलाशता है। संगठन के सचिव जयेश जोशी ने गुरुवार को यहां बताया कि इसका कार्यक्षेत्र जनजातीय बहुल क्षेत्रों बांसवाड़ा, डुंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में है। यहां लोगों के जीवनयापन का एकमात्र साधन कृषि और वन के उत्पाद हैं। उनके पास अपनी भूमि भी नहीं है। मवेशी चराकर और दूसरों की जमीन पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। मानव विकास सूचकांक और आधारभूत संरचनाओं की दृष्टि से यह क्षेत्र अब भी पिछड़ा हुआ है।
जोशी ने जोर देकर कहा कि वाग्धारा को संयुक्त राष्ट्र से विशेष सलाहकार का दर्जा मिलने के बाद यह उस दिशा में और अधिक उत्साहपूर्वक काम करेगा। प्रभावित लोगों की समस्याएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाई जाएंगी और उनके विकास के लिए सार्थक प्रयास किए जाएंगे। इस संगठन ने अब तक क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, लोगों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई, बांधों के निर्माण और लिंगानुपात को बेहतर बनाने के लिए काम किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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