जनता के दोषी हैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों के साथ मुखातिब हुए मनमोहन सिंह पर जब सवालों की बौछार हुई, तो कई जगह उन्होंने डिफेन्डिंग शॉट खेले। कई जगह गेंद राज्य सरकारों और विपक्षी दलों के पाले में डाली। लेकिन क्या ऐसा करने से गरीब जनता के आंसू पुछ जाएंगे। कतई नहीं! अगर प्रधानमंत्री ने खुद को दोषी माना है तो उन्हें ही सरकार पर लगे दागों को मिटाना होगा। क्योंकि ये दाग अच्छे नहीं।
ये दाग चुटकी में गायब भी नहीं होंगे। इसके लिए प्रधानमंत्री को कड़ा रुख अपनाते हुए सबसे पहले कृषि मंत्री शरद पवार की नकेल कसनी होगी। ऐसे में गठबंधन की परवाह करते हुए अगर वो कुछ नहीं बोले तो महंगाई इसी प्रकार बढ़ती जाएगी। प्याज फिर 100 रुपए किलो बिकेगा, पेट्रोल 200 रुपए में और रसोई गैस की कीमत 600 रुपए तक पहुंच जाएगी।
दूसरा सबसे बड़ा कदम राजा की जेब से 1.75 लाख करोड़ रुपए निकालकर सरकारी कोष में जमा करना होगा। पीएम को पता है कि इतनी बड़ी रकम अब वापस नहीं मिल सकती, इसी लिए उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह सीएजी की रिपोर्ट में अनुमानित राशि है। असल राशि इससे कम हो सकती है।
प्रधानमंत्री जी असल राशि अनुमानित से ज्यादा हुई तो आप क्या करेंगे। उन्होंने बड़ी सफाई के साथ कपिल सिब्बल की उस बात का समर्थन कर दिया, जिसमें 2जी घोटाले में शून्य रुपए के घाटे की बात कही गई है।
तीसरा कदम विदेशी बैंकों में जमा पैसा है। प्रधानमंत्री जी आप जब खुद कह रहे हैं कि आपके पास उन लोगों की सूची है, जिन्होंने काला धन विदेशों में जमाकर रखा है, तो आंकड़े भी जरूर होंगे। जरा सोचिए अगर विदेशी बैंकों में जमा काला धन और 2जी रकम की वसूली जो जाए तो भारत को ब्रिटेन के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।












Click it and Unblock the Notifications