दूसरसंचार ऑपरेटरों के हिस्सेदारी बेचने की बात बताई गई थी : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मुझे बताया गया था कि दूरसंचार संचालकों ने शेयरधारकों को हिस्सेदारी नहीं बेची है, बल्कि उन्होंने इसे इस तरीके से हिस्सेदारी बेची है कि प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम हो जाए। अब यदि उन्हें सेवाएं शुरू करनी है तो धन की आवश्यकता होगी और यह धन उधारी लेकर या फिर हिस्सेदारी कम करके अर्जित की जा सकती है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "इसलिए उस समय मुझे नहीं लगा कि इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।"
जिन कम्पनियों को 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटित हुए थे, वे तत्काल भारी कमाई की कोशिश करने के आरोपी हैं, क्योंकि उन्होंने दूरसंचार कम्पनियों में विदेशी संयुक्त उपक्रम साझेदारों या अन्य कम्पनियों को महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बेच दी थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार यूनिटेक को 22 सर्किल्स में 1,658 करोड़ रुपये में यूनीफाइड एसेस सर्विस लाइसेंस आवंटित किए गए थे। इस कम्पनी ने सेवा शुरू करने के पहले ही नार्वे की टेलीनार को अपनी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी 6,100 करोड़ रुपये में बेच दी।
इसी तरह स्वान टेलीकॉम को 13 सर्किल्स में 1,537 करोड़ रुपये में लाइसेंस आवंटित किए गए थे और इसने एटिसलेट को 4,200 करोड़ रुपये में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। बाद में इस कम्पनी का नाम बदल कर एटिसलेट डीबी टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड हो गया।
डीबी रियटिली के प्रबंध निदेशक शाहिद बलवा इस मामले में पहले से सीबीआई हिरासत में हैं। स्वान टेलीकॉम का स्वामित्व डीबी रियल्टी के ही पास है।
स्वान टेलीकॉम और यूनिटेक की ही तरह डेटाकॉम ने अपनी बड़ी हिस्सेदारी बहरीन टेलीकॉम को बेच दी थी। डेटाकॉम का नाम बाद में वीडियोकॉन मोबाइल और एस टेली हो गया। इसके अलावा अन्य कम्पनियों में टाटा टेली, आइडिया सेलुलर, लूप टेलीकॉम, श्याम टेलीलिंक और स्पाइस भी जांच के दायरे में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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