तहरीर चौक से जाने लगे हैं प्रदर्शनकारी
समाचार वेबसाइट 'बीबीसी डॉट को डॉट यूके' के अनुसार सशस्त्र सेनाओं की उच्च परिषद ने छह महीने तक सत्ता में बने रहने को कहा है जब तक कि चुनाव संपन्न नहीं हो जाते।
सशस्त्र सेनाओं की उच्च परिषद की इस घोषणा का कई प्रदर्शनकारियों ने स्वागत किया है।
उल्लेखनीय है कि मिस्र में लगातार 18 दिनों तक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया था।
मिस्र में हालात सामान्य करने के प्रयास के तहत सरकारी बैंकों में सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। प्रदर्शन के चलते इन बैंकों का काम-काम प्रभावित हुआ है।
अरबी समाचार चैनल 'अल जजीरा' के अनुसार मंगलवार को सार्वजनिक छुट्टी की वजह से बैंक बुधवार को फिर से खुलेंगे।
कुछ अन्य रपटों में कहा जा रहा है कि सेना श्रम और अन्य पेशेवर संगठनों की बैठकों पर रोक लगा सकती है।
विरोध प्रदर्शनों के कारण मिली कामयाबी से उत्साहित अब कुछ कर्मचारी अपने अधिकारियों को हटाना चाहते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कम्पनियों में अधिकारियों और उनके वेतन में भारी अन्तर है।
प्रदर्शनकारी मुख्य प्रदर्शन केंद्र तहारीर चौक से जाने लगे हैं लेकिन अभी भी कुछ लोग वहां जमे हुए हैं।
एक सरकारी चैनल पर रविवार को एक बयान में सशस्त्र सेनाओं की उच्च परिषद ने कहा था कि संविधान को रद्द कर दिया जाएगा और नया संवैधानिक मसौदा तैयार करने के लिए एक नई समिति गठित की जाएगी। इसके बाद जमनत संग्रह कराया जाएगा।
मिस्र के पुराने संविधान के मुताबिक कई राजनीतिक दल और समूह चुनाव में हिस्सा लेने से वंचित थे। इसमें केवल मुबारक की वफादार पार्टी 'नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी' भाग लेती थी।
उधर, कार्यवाहक प्रधानमंत्री अहमद शफीक ने कहा है कि देश की सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना है। मिस्रवासियों में सुरक्षा की भावना को वापस लाने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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