'दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संरक्षण जरूरी'
संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित संस्कृत अकादमी में रविवार को आयोजित विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों ने पांडुलिपियों का संरक्षण करने के लिए प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। दिल्ली से आए आर.एम. नवानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के गूढ़ रहस्य पांडुलिपियों में दर्ज हैं, लेकिन पांडुलिपियों का संरक्षण न होने से यह ज्ञान समाज के काम नहीं आ पा रहा है।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में पता चला है कि देश में 50 लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपि हैं। इन पांडुलिपियों को अमूल्य धरोहर की तरह सहेजकर रखना होगा।
संस्कृत अकादमी के सचिव बुद्धदेव शर्मा ने कहा कि अधिकांश लोग इन पांडुलिपियों का संरक्षण करने के स्थान पर उन्हें नदियों में प्रवाहित कर रहे हैं, जिससे कि पांडुलिपियां नष्ट हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में अमूल्य ज्ञान को सहेजने के लिए पांडुलिपि तैयार की जाती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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