जी-4 देशों का सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग (लीड-1)
चारों देशों के विदेश मंत्रियों की शुक्रवार को यहां हुई बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में एक ठोस परिणाम की दिशा में सुरक्षा परिषद के अत्यावश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू करने हेतु सदस्य देशों की पहल के लिए व्यापक समर्थन मौजूद है।"
विदेश मंत्रियों की इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा, ब्राजील के एंटोनियो डी एगियार पैट्रियोटा, जर्मनी के गुइडो वेस्टरवेल्ले और जापान के टेकीकी मात्सुमोतो ने हिस्सा लिया।
बयान में कहा गया है, "मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में जल्द से जल्द विस्तार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने पर सहमति जताई है।"
बयान में कहा गया है, "इस लक्ष्य के लिए जी-4 देशों ने अन्य देशों तक पहुंचने और उदारता की भावना के साथ उनके साथ मिल कर काम करने की अपनी तैयारी की पुष्टि की।"
ये चारों देश परिषद के मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों-अमेरिका, रूस, चीन फ्रांस और ब्रिटेन के बराबर का दर्जा चाहते हैं। इन देशों ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के सामने खड़ी प्रमुख मौजूदा चुनौतियों पर उनके यहां कई सारी स्थितियां एक जैसी हैं।
चारों देशों ने अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और परिषद की कार्यपद्धति में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारत ने विकास एवं सुरक्षा के प्रति वैश्विक प्रयासों के लिए राष्ट्र निर्माण के अपने अनुभव का प्रस्ताव देते हुए शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ढांचे के सुधार का आान किया।
कृष्णा ने सुरक्षा परिषद में कहा, "शांति बहाली के वैश्विक अभियानों में जितना योगदान भारत ने किया है, उतना किसी देश ने नहीं किया है।"
कृष्णा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थायी सदस्य बनने के बाद पहली बार यहां बोल रहे थे।
शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने तथा शांति स्थापना के लिए अंतर्राष्ट्रीय ढांचे के सुधार का आान करते हुए कृष्णा ने कहा, "समस्याओं से निपटने वाली वैश्विक ताकत और क्षमताएं आज के छह वर्ष पहले जो थीं, आज उनमें काफी बिखराव आ गया है। मौजूदा ढांचे को चाहिए कि वह इन वास्तविकताओं को हर हाल में स्वीकार करे और कमियों को दूर करे।"
कृष्णा ने कहा कि भारत, 19 वर्षो बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वापस लौटा है। यह भारत के लिए रूपांतरकारी साबित हुआ है। उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि प्रभावी और सक्षम सुरक्षा परिषद हम सभी के हित में है और हम इसकी मजबूती के लिए काम करेंगे।"
कृष्णा ने कहा कि भारत, सुरक्षा परिषद की अपनी सदस्यता के साथ जुड़ी उम्मीदों को समझता है और पांच स्थायी सदस्यों और निर्वाचित सदस्यों, खासतौर से वे जिनकी साख स्थायी सदस्यता के लिए स्वीकारी जा चुकी है, के बीच प्रभावी सामंजस्य को लेकर वास्तव में सजग है।
कृष्णा ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि घनिष्ठ सहयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दों पर हम सभी एक हैं।"
कृष्णा ने अधिक विकास एवं सुरक्षा के वैश्विक प्रयासों के लिए उपलब्ध, राष्ट्र निर्माण में भारत द्वारा छह दशकों के दौरान हासिल किए जा रहे व्यापक अनुभव के प्रति भी प्रतिबद्धता दोहराई।
कृष्णा ने कहा, "हमारे शांति कार्यकर्ता प्रारम्भ में शांति संस्थापक रह चुके हैं। हम विकास सम्बंधी पहलों में द्विपक्षीय स्तर पर, और बहुपक्षीय स्तर पर योगदान करने के प्रति भी बचनबद्ध हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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