दवा परीक्षण में 10 गैस पीड़ितों की मौत

भोपाल, 10 फरवरी (आईएएनएस)। यूनियन कार्बाइड गैस कांड के पीड़ितों पर अनैतिक तौर पर दवाओं का परीक्षण किया गया है, जिससे 10 से अधिक पीड़ितों की मौत हुई है। यह खुलासा केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (नई दिल्ली) द्वारा गैस पीड़ितों के लिए संघर्षरत संगठनों को उपलब्ध कराई गई जानकारी से हुआ है। इन संगठनों ने जिम्म्मेदार वरिष्ठ चिकित्सकों को निलंबित करने की मांग की है।

संगठनों की ओर से बुलाई गई संयुक्त पत्रकारवार्ता में बताया गया है कि उन्हें केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन, नई दिल्ली ने जो जानकारी उपलब्ध कराई है, वह चौंकाने वाली है। इसके अनुसार गैस पीड़ितों पर सात दवाओं की जांचों में से मात्र एक जांच पर भारत के दवा महानियंत्रक द्वारा निगरानी रखी गई थी।

जानकारी के अनुसार तीन गैस पीड़ितों की मौत उन पर किया गया टेलीवैनसीन दवा के परीक्षण की वजह से हुई। पांच पीड़ित फॉनडापरिनक्स और दो टाइगेसाइक्लिन दवाओं के परीक्षण में मारे गए हैं।

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एण्ड एक्शन, भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों को सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से यह खुलासा हुआ है कि गैस पीड़ितों पर अनैतिक दवा परीक्षणों के लिए भोपाल मेमोरियल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों को फाइजर, एस्ट्रा जेनेका और सेनोफी जैसी बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों से एक करोड़ से अधिक राशि मिली है।

इन संगठनों ने हृदय रोग विभाग के दो चिकित्सकों एवं पेट रोग विभाग के चिकित्सक को इन मौतों के लिए जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि भोपाल मेमोरियल अस्पताल में शोध के लिए निगरानी समिति है, जिसकी सचिव एक चिकित्सक की पत्नी हैं। उन्होंने ने ही इन परीक्षणों को स्वीकृति दी।

मरने वाले गैस पीड़ित नासिर खान (34) के चिकित्सीय दस्तावेजों को प्रस्तुत करते हुए संगठनों ने बताया कि जुलाई 2007 में उनके ऊपर क्लोपिडरोजेल नाम की दवा के साथ खून को पतला करने वाली एक अन्य दवा एस्पिरीन का भी इस्तेमाल किया गया। संगठनों ने बताया कि जुलाई 2004 में अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'लैंसेट' में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बताया जा चुका है कि क्लोपीडरोजेल एवं एस्पिरीन एक साथ इस्तेमाल करने पर ज्यादा खून बहने की वजह से मौत की आशंका रहती है।

संगठनों ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार को भोपाल मेमोरियल अस्पताल के द्वारा किए गए दवा परीक्षण के मामले में सितम्बर 2010 तक रिपोर्ट पेश करनी थी जो आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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