उल्फ़ा और केंद्र की बातचीत आज से

केंद्र के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह सचिव जीके पिल्लइ कर रहे हैं. उल्फ़ा के तथाकथित कमांडर इन चीफ़ परेश बरूआ ने शाँति प्रकिया को ठुकराते हुए अपना संघर्ष जारी रखने का फ़ैसला किया है. बातचीत शुरू होने से पहले कुछ मतभेदों को दूर करने के लिये राजखोवा और उनके साथियों ने असम के मुख्य मंत्री तरूण गोगोई से मुलाक़ात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन दशक पुराने इस संघर्ष का जल्द हल निकल आएगा.
गोगोई ने परेश बरूआ को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया कि हमेशा हंगामा खड़ा करना उनकी आदत रही है. उनका कहना था कि परेश बरूआ के लोगों के लिए आतंक जीवन का हिस्सा बन चुका है लेकिन सरकारी बल उनसे निपटने में सक्षम है.
संभावना है कि उल्फ़ा के नेता 13 फ़रवरी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाक़ात करेंगे क्योंकि वह राज्य सभा में असम का प्रतिनिधित्व करते हैं.
उल्फ़ा के कई सदस्यों को हाल ही में रिहा किया गया है जिससे कि बातचीत का माहौल बन सके उल्फ़ा की स्थापना असम में ग़ैर कानूनी ढ़ंग से बसने वाले वालों को रोकने के लिए 1979 में हुई थी. आरोप है कि उसने कई सालों तक जबरन वसूली, अपहरण और हत्याओं का सिलसिला जारी रखा.
1992 में उसमें फूट पड़ गई और आधे से ज़्यादा लोगों ने आत्म समर्पण कर दिया था. 5 फ़रवरी को उल्फ़ा ने घोषणा की थी कि वह असम के लोगों की भावनाओं के सम्मान करते हुए केद्र से बिना शर्त बातचीत शुरू करेगी. हालांकि संगठन का एक धड़ा बातचीत के पक्ष में अब भी नहीं है और उन्होंने पिछले दिनों अपने ही संगठन के नरमपंथी सहयोगियों और केंद्र सरकार के बीच वार्ता को भंग करने की धमकी दी थी.
उल्फ़ा के कट्टरपंथी धड़े की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था वे अपनी लड़ाई जारी रखने के प्रति दृढं संकल्प हैं. उल्फ़ा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ की अगुवाई वाले कट्टरपंथी धड़े के प्रसार सचिव अनिरुद्ध दुहोतिया ने बयान जारी कर कहा था, "असम की स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखने के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या है."












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