हंगामा क्यों है बरपा, माया की जूती ही तो साफ की!

आपको मायावती का जन्मदिन याद होगा। मंच पर जैसे की मायावती ने केक काटा, डीजीपी विक्रम सिंह ने उसका एक स्लाइस काटकर मायावती को मुंह में खिलाया। सच पूछिए तो वो भी चाटूकारिता का एक बड़ा उदाहरण ही तो है। अगर डीजीपी सीएम को केक खिला सकते हैं तो डीसीपी जूती क्यों नहीं साफ कर सकता?
इस घटना ने सिर्फ पद्म सिंह की चाटूकारिता ही नहीं झलक कर सामने आयी है, बल्कि मायावती के पूरे महकमे में चाटूकारों की भरमार है। उन्हीं के लीडर हैं राज्य के मुख्य सचिव शशांक शेखर जिन्हें हम नेक्स्ट टू सीएम मानते हैं। जब उन्हें पद्म सिंह की जूती साफ करने पर कोई ऐतराज नहीं तो जनता को क्यों। जब मुख्य सचिव खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं, कि यह हमारी ड्यूटी है, तो आम जनता को क्या।
सही मायने में जनता को इस घटना से कोई फर्क नहीं पड़ा है, यह मीडिया ही है, जो इस मामले को उछाल रहा है। जनता की मानें तो उसे इस बात का अहसास हो चुका है कि राज तंत्र पूरी तरह प्रशासन पर हावी हो चुका है।
अंत में हम ये क्यों भूल जाएं कि मायावती ने इस साल से प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान कांशीराम पुरस्कार जो घोषित किया है। ये पुरस्कार हमें या आपको तो मिलने से रहा, कहीं ये अधिकारी ही तो इस पुरस्कार को पाने की होड़ में तो नहीं हैं? अगर हां, तो इस साल पद्म सिंह का नाम सूची में सबसे ऊपर होगा। उनका पक्ष लेने वाले शशांक शेखर या सीएम को केक खिलाने वाले विक्रम सिंह भी इस दौड़ में आगे हो सकते हैं। अगर इनके अलावा और कोई भी है, तो जल्द ही वो भी अपनी चाटूकारिता का परिचय देते हुए मीडिया के कैमरे में कैद हो जाएगा।












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