जैसा रखेंगे दृष्टिकोण, वैसा मिलेगा जीवन

नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। विश्व के जाने-माने दार्शनिक जुआन ने मरने के कुछ ही क्षणों बाद खुद को ऐसी जगह पाया, जहां पर खूब आराम और आनंद था। इतने आराम की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, क्योंकि वहां रहने के लिए आलीशान भवन था और उसमें हर तरह की सुख-सुविधाएं थीं। खूब नौकर-चाकर थे और फरिश्ते स्वागत के लिए उपस्थित थे।

कुछ देर बाद सफेद कपड़े पहने एक फरिश्ता जुआन के पास आया और बोला, "आप जो भी चाहते हैं, वो सब आपको मिलेगा। यानी अच्छा भोजन, अच्छे कपड़े, सुंदर अप्सराएं और कमसिन नृत्यांगनाएं।"

जुआन उन सुखों में मस्त हो गए, फिर कई दिनों तक उन सुखों को भोगने के बाद वह ऊब गए। एक दिन उन्होंने सफेद कपड़े पहने फरिश्ते से कहा, "मेरी जो भी इच्छा थी वह पूरी हो गई। अब मैं कुछ काम करना चाहता हूं, ताकि खुद को व्यस्त रख सकूं। क्या मुझे कोई काम मिलेगा?"

"क्षमा चाहता हूं।" मुस्कराते हुए फरिश्ते ने कहा, "यही एक चीज हम आपको नहीं दे सकते, क्योंकि यहां पर कोई काम है ही नहीं।"

"मैं ऐसे दिन नहीं गुजार सकता। आप मुझे तुरंत ही नरक में भेज दीजिए।" फरिश्ते ने धीमे स्वर में कहा, "यह आपका दृष्टिकोण है कि आप स्वर्ग में हैं, जबकि आप इस समय नरक में ही हैं।"

इसलिए आप अपने दृष्टिकोण को साफ रखिए और नीचे लिखे गुरुमंत्रों को मस्तिष्क में अंकित कीजिए :

* बड़े लोगों को देखकर क्या आपके मन में कभी यह सवाल नहीं आता कि हम भी उनके जैसे प्रभावशाली बनें?

* आपका दृष्टिकोण आपके जीवन को निर्धारित करता है, लेकिन आप क्या बनना चाहते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या सोचते हैं?

* जब आप किसी पुस्तक को साधारण दृष्टिकोण से पढ़ते हैं, तब वह पुस्तक आपको प्रेरणदायक और विचारोत्तेजक लगती है, लेकिन जब आप उस पुस्तक को ध्यान से पढ़ते हैं, तब वह गीता और रामायण जैसी लगने लगती है।

* जब पूरी दुनिया कहती है कि आप सफल नहीं हो सकते, तब आपका दिल कहता है कि मैं अवश्य ही सफल हो जाऊंगा। इसका मतलब होता है कि आप आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं और आप आखिरी कोशिश करने में विश्वास रखते हैं।

* यदि विपत्ति न आए तो समृद्धि का पता नहीं चलता है, क्योंकि जाड़ा न होने पर वसंत कैसे आएगा?

* कोई भी चीज अच्छी या बुरी नहीं होती, आपका दृष्टिकोण ही उसे अच्छा या बुरा बनाता है।

* खुशी और काम के बीच में गहरी दोस्ती होती है, क्योंकि जब तक आपको खुशी महसूस नहीं होगी, तब तक आप अपने काम में सफलता हासिल नहीं कर सकते।

* काम करते-करते अपने आपको दीवाना मत बना लीजिए, क्योंकि दीवानों का दृष्टिकोण नकारात्मक होता है।

* आप लंबी छुट्टी लें कि आपका बॉस आपको याद करते लगें, लेकिन इतनी लंबी छुट्टी भी न लें कि वह आपके बिना काम चलाने का तरीका खोज लें।

* रोज आठ घंटे काम करके आप बॉस से तरक्की पा सकते हैं, लेकिन 12 घंटे काम करके आप खुद बॉस बन सकते हैं।

(डायमंड बुक्स, प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित पुस्तिक 'सीक्रेट्स ऑफ सक्सेस' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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