डाकघर वितरित करेंगे अनन्य पहचान संख्या
यूआईडीएआई के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी का कहना है, "यह एक सुनियोजित साझेदारी है, जिसमें यूआईडीएआई लोगों तक पहुंचने के लिए डाकघरों के मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करेगा।"
प्राधिकरण डाकघरों में अनन्य पहचान संख्याओं के पंजीकरण और वितरण के लिए अगले कुछ दिनों में एक एजेंसी नियुक्त करेगा।
अनन्य पहचान संख्याओं सम्बंधी कार्य के लिए फरवरी 2009 में यूआईडीएआई को स्थापित किया गया था।
यूआईडीएआई लोगों को ऐसी अनन्य पहचान संख्या देंगे जो उनकी विशिष्ट पहचान (शारीरिक चिन्ह) और तस्वीरों से जुड़ी होगी। चुनावों में होने वाली धांधली को रोकने व सरकारी सब्सिडी और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में होने वाली व्यापक गड़बड़ियों को रोकने के उद्देश्य से नागरिकों को अनन्य पहचान संख्याएं वितरित की जा रही हैं।
डाक विभाग ने यूआईडीएआई के साथ 30 अप्रैल, 2010 को पहला समझौता किया था। इस समझौते के तहत विभाग को यूआईडी संख्या के लिफाफों पर लोगों के आवासीय पतों की प्रिंटिंग करना थी।
इस समझौते से 11 मार्च, 2011 तक करीब एक करोड़ यूआईडी पत्रों के प्रिंट होने और उन्हें लोगों तक पहुंचाए जाने की उम्मीद है। वर्ष 2011-12 के बीच डाक विभाग के करीब 12 करोड़ यूआईडी पत्र प्रिंट करने और उन्हें लोगों तक पहुंचाए जाने की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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