करमापा कार्यालय का दावा, आरोप निराधार
करमापा के कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि मीडिया में हाल ही में कई खबरों में कहा गया है कि करमापा चीन के जासूस या एजेंट हैं और उन्होंने भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों में जमीनों का अधिग्रहण किया है। बयान में इसे निराधार बताते हुए कहा गया है कि न तो करमापा और न ही उनके कार्यालय के पास ही ऐसी जमीनों का स्वामित्व है।
कुछ खबरों में सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने करमापा के कब्जे से चीन के सिम कार्ड्स जब्त किए हैं और उनकी चीन के अधिकारियों के साथ बातचीत रिकार्ड की गई है। करमापा के कार्यालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसी रपटें गलत है और इनसे तिब्बतियों की सम्मानित हस्ती की छवि प्रभावित हुई है। विज्ञप्ति में मीडिया से अपील की गई है कि वह करमापा का चरित्र हनन न किया जाए।
पुलिस द्वारा करमापा के निवास से जब्त की गई विदेशी मुद्रा में चीनी मुद्रा युआन भी मिलने के बारे में बयान में कहा गया है कि चीन के तिब्बत क्षेत्र में युआन का ही प्रचलन है। ऐसे में तिब्बत क्षेत्र के अनुयायी दान में युआन ही देते हैं। इसी तरह चीन के अन्य हिस्सों में रहने वाले तिब्बती भी युआन ही दान करते हैं। बयान में जोर देकर कहा गया है कि जब्त की गई विदेशी मुद्रा में युआन 10 प्रतिशत से भी कम है।
बयान के अनुसार तिब्बतियों के शीर्ष धर्म गुरु दलाई लामा पहले ही सार्वजनिक तौर पर 17 वें करमापा में भरोसा व्यक्त कर चुके हैं। तिब्बत की सरकार भी उन्हीं के ही साथ है। इतना ही नहीं स्वयं करमापा ने भी गुरुवार को कहा था कि उनका भारत की कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और सच्चाई एक दिन स्वयं उजागर होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत, तिब्बतियों की दूसरी सरजमीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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