आसमान छू रही खाद्य महंगाई, आखिर खाए क्या आदमी?
गैर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर इस सप्ताह में 25 फीसदी से ऊपर हो गई जो कि इससे पहले के सप्ताह में 22.48 फीसदी थी। ईंधन की महंगाई दर इस अवधि में 11.61 फीसदी दर्ज की गई। दिसम्बर महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 8.43 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
दाल, दूध, सब्जी, अनाज, तेल जैसी रोजमर्राह की चीजें पिछले कुछ महीनों में इतनी महंगी हो गईं है कि देश की अधिकांश जनता के सामने पेट भरने के बजाय आतमहत्या करना ज्यादा सरल हो गया है। हर सप्ताह के आंकड़ों के साथ ही खाद्य महंगाई दर एक फीट और ऊपर चली जाती है। सरकार के तमाम दावे झूठे और निराधार साबित हो रहे हैं।
दूध और फल लोगों के लिए सपना होते जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि सरकार आखिरकार लोगों को सस्ते दामों पर ये चीजें क्यों नहीं उपलब्ध करवा पा रही। बाजार को बेलगाम और जरूरत की चीजों पर सब्सिडी इस दलील के साथ खत्म की गई थी कि ऊपर की आमदानी नीचे आती है। लेकिन इतनी महंगाई में भी सरकार हर बार अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की दुहाई देना और अपनी असमर्थता जताना देश को भयानक हालातों की ओर ले जा रहा है।
मालूम हो कि इसी बीच 21 फरवरी से संसद में बजट सत्र शुरू होने वाला है। पिछला शी तकालीन सत्र भी महंगाई समेत अन्य मुद्दों की भेंट चढ़ गया था। शीतकालीन सत्र के बाद से भ्रष्टाचार के नित नये मामले सामने आ रहे हैं और पिछले मामलों में नये मोड़ आ रहे हैं, जिनके चलते केंद्र सरकार की मुसीबतें पहले ही बढ़ी हुई हैं। उस पर से विपक्ष दिन-प्रतिदन आक्रामक नीतियों के जरिए केंद्र सरकार पर चारों ओर से हमला कर रहा है। केंद्र सरकार का मंत्रिमंडल में नये चेहरे शामिल करना भी सरकार की मुसीबतों को घटा नहीं रहा है।













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