जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा व्यवस्था चरमराई
पटना। बिहार में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। राज्य के सबसे बड़े माने जाने वाले पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के सभी वार्डो में मरीज और उनके परिजन बेहाल हैं।राज्य में गया स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक विधायक के सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई गोलीबारी में तीन जूनियर डॉक्टर घायल हो गए।
इस घटना के बाद सभी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। हड़ताल का सर्वाधिक प्रभाव उन मरीजों पर पड़ा है जिनका कुछ दिनों पूर्व ही ऑपरेशन हुआ था। इनका इलाज पूरी तरह नर्सो पर निर्भर हो गया है।पीएमसीएच में जिधर जाइए, चीख-पुकार मची हुई है। कहीं कोई बेटा अपनी मां की हालत को देखकर रो रहा है तो कहीं मां अपने कलेजे की टुकड़े के इलाज के लिए लोगों से मनुहार कर रही है। यह स्थिति एक वार्ड की नहीं है। पीएमसीएच का आपातकालीन कक्ष हो या प्रसूति वार्ड, सभी जगह ऐसे दृश्य देखे जा रहे हैं।
रामपति महतो काफी उम्मीद के साथ बक्सर से अपने पिता का इलाज कराने यहां आए थे कि बड़े अस्पताल में आकर उसके पिता ठीक हो जाएंगे, परंतु कुछ ही घंटे में उनकी कहानी ही खत्म हो गई। स्थिति यह है कि चार घंटे से वह मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
प्रसूति विभाग में प्रसव के लिए भर्ती होने आई माधोपुर दियारा की संध्या देवी ने देर होने के कारण लेबर रूम में नहीं जा पाईं और बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके पहले संध्या के ससुर शिवप्रसाद साहु परेशान रहे, परंतु उनकी सुनने वाला वहां कोई नहीं था।
पीएमसीएच के उपाधीक्षक आऱ क़े सिंह का कहना है कि देर होने से ऐसा हो जाता है। उन्होंने माना कि हड़ताल के कारण स्थिति खराब हुई है, परंतु इसमें सुधार लाया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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