हमें रेलगाड़ी की छत पर बैठाया गया : पीड़ित
लखनऊ, 2 फरवरी(आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर हादसे में बाल-बाल बचे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की भर्ती में आए अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें किसी और ने नहीं बल्कि पुलिस और सुरक्षाबलों ने ही रेलगाड़ियों की छत पर चढ़कर सफर करने को मजबूर किया।
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर बुधवार दोपहर पहुंचे अभ्यर्थियों ने कहा कि पुलिस और सुरक्षाबलों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें किसी भी हाल में बरेली छोड़ देने को कहा था।
बिहार में लखीसराय के रहने वाले प्रमोद कुमार ने आईएएनएस को बताया कि जब कुप्रबंधन के चलते आईटीबीपी बरेली सेंटर के बाहर अभ्यर्थियों ने बवाल मचाया तब पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने खदेड़ते हुए उन्हें बस अड्डे और रेलवे स्टेशन की तरफ जाने पर मजबूर कर दिया।
कुमार ने बताया, "हम से कहा गया कि किसी भी हालत और किसी भी तरह जल्द से जल्द बरेली छोड़ना है। चाहे इसके लिए तुम लोगों को रेलगाड़ी के ऊपर ही चढ़कर क्यों न जाना पड़े।"
गौरतलब है कि मंगलवार शाम को शाहजहांपुर के रोजा स्टेशन समीप हिमगिरि एक्सप्रेस की छत पर बड़ी संख्या में सवार युवकों में से 20 से अधिक ओवरब्रिज से टकरा गए थे।
अभ्यर्थियों के मुताबिक पुलिस की चेतावनी की वजह से सभी में हिमगिरि एक्सप्रेस पकड़ने की होड़ मच गई। रेलगाड़ी पूरी तरह से भर चुकी थी और पैर रखने तक को जगह नहीं थी। यह सब कुछ देखते हुए भी पुलिस ने कड़ा रुख अपनाए रखा और लाठियां भांजी। ऐसे हालात में सभी रेलगाड़ी की छत पर बैठकर बरेली से आने को विवश थे।
अभ्यर्थियों ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सिर्फ हिमगिरि एक्सप्रेस में ही ठूंसने का काम नहीं किया बल्कि उस समय आ रही अन्य मालगाड़ियों पर भी चढ़ने को मजबूर कर दिया।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी पंकज कुमार ने बताया, "गुस्साए पुलिस और सुरक्षाबलों ने अपनी जिद के आगे हमें बोलने तक का मौका नहीं दिया। वे केवल एक बात पर अड़े थे कि बरेली छोड़ो। उसी दौरान उन्होंने हमसे आ रही मालगाड़ियों पर सवार होने को कहा।"
खौफनाक मंजर को याद करते हुए आजमगढ़ के रमाकांत देवव्रत ने बताया कि वह उन खुशकिस्मत अभ्यर्थियों में से एक हैं, जो रेलगाड़ी पर चढ़ने में कामयाब रहे।
देवव्रत ने बताया, "लोग एक-दूसरे के ऊपर लदे हुए थे। रेलगाड़ी के शाहजहांपुर से लखनऊ की तरफ रवाना होने के दौरान मैंने खिड़की से देखा कि कई लोग छत से नीचे गिर पड़े। उस समय मुझे लगा कि अभ्यर्थी कूद रहे हैं लेकिन थोड़ी देर बाद मैंने अपने कपड़ों पर खून की छीटें देखीं, तब किसी अनहोनी का शक हुआ।"
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि हादसे के एक घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया। देवव्रत ने बताया, "घटना के एक घंटे बाद तक वहां कोई नहीं पहुंचा। वहां मौजूद छात्रों को गुस्सा आया और फिर आगजनी शुरू हो गई।"
उधर, बरेली परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक प्रकाश डी. से जब अभ्यार्थियों के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "फिलहाल उनके समक्ष ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर आपके पास उन सुरक्षाकर्मियों के नाम हैं तो बताइए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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