हमारे जासूस नहीं करमापा :चीन
बीजिंग। देश में एक ओर तिब्बती धर्मगुरु 17वें करमापा का मामला उलझता चला जा रहा है वहीं इस पूरे मसले पर चीन ने कहा है कि, इस मामले से पता चलता है कि भारत, चीन को लेकर किस तरह का अविश्वसनीय रवैया अपनाए हुए है। चीनी अधिकारियों ने करमापा के अपने लिए काम करने का खंडन किया है।
चीन ने कहा है कि करमापा ने साल 1999 में हमारे देश में स्थित मठ छोड़ दिया था। इसके बाद से हमरा देश और उनके कोई संपर्क नहीं हैं। इधर भारतीय मीडिया में यह कयास बड़ी जोर-शोर से लगाए जा रहे हैं कि भारत-चीन सीमा पर स्थित मठों को अपने नियंत्रण में करने के लिए चीन ने करमापा को एक योजना के तहत भेजा है।
चीनी अधिकारी झू झिताओ ने समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' के साथ बातचीत के दौरान कहा, "करमापा के मामले में भारतीय मीडिया यह कयास लगा रहा है वह चीन के जासूस हैं। इससे साबित होता है कि भारत, चीन को लेकर किस तरह का अविश्वसनीय रवैया अपनाए हुए है।" गौरतलब है कि करमापा जनवरी 2000 में तिब्बत से भारत आए थे। तब से लेकर अब तक वह ज्यादातर धर्मशाला के सिद्धबारी मठ में रहते रहे हैं।













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