मिस्र में सत्ता परिवर्तन के लिए 10 लाख लोग निकालेंगे जुलूस
काहिरा। मिस्र के प्रदर्शनकारियों ने पिछले 30 सालों से सत्ता में काबिज राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से बाहर करने के लिए अपना विरोध बढ़ाने और मंगलवार को एक बड़ा जुलूस निकालने की योजना बनाई है, जिसमें 10 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी हिस्सा लेंगे।समाचार चैनल अल जजीरा ने सोमवार को कहा कि जुलूस में 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल करने की योजना है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अभी तक कम से कम 150 लोग मारे जा चुके हैं।
सेना के लड़ाकू विमानों और टैंकों की परवाह किए बगैर प्रदर्शनकारियों ने राजधानी काहिरा की सड़कों पर सुबह कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया।इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यहां के हालात के बारे में तुर्की, इजरायल, सऊदी अरब और ब्रिटेन के नेताओं से चर्चा की है।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे मिस्र के असंतुष्ट नेता मोहम्मद अल बरदई ने इससे पहले रविवार को हजारों प्रदर्शकारियों से वादा किया था कि उनके प्रदर्शनों से देश में हर हाल में बदलाव आएगा।मध्य काहिरा के तहरीर स्क्वे यर में प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अल बरदई ने कहा, "हमने आज जो शुरुआत की है उससे पीछे नहीं हट सकते।" उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक दिवस' करार दिया। अल बरदेई अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पूर्व प्रमुख हैं।
अल बरदई ने कहा, "मिस्र में हम नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।" अल बरदई विपक्ष को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन लम्बे समय तक देश से बाहर रहने के कारण उनको विश्वास हासिल करने में दिक्कतें आ रही हैं।उधर तटवर्ती शहर अलेक्जेंड्रिया और बंदरगाह शहर स्वेज में भी हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए।
विरोध प्रदर्शन के कारण मिस्र की अर्थव्यवस्था का नुकसान पहुंचा है। रेटिंग एजेंसी ने मिस्र के बांड की रेटिंग कम कर दी है। इसके अलावा मंगलवार को मिस्र का शेयर बाजार बंद रहा।कैरो के कुछ हिस्से के लोगों ने खाद्य पदार्थो और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि की बात कही। सोमवार को बैंक बंद रहे। लूटपाट के कारण एटीएम में नकदी नहीं रही।
मुबारक के हटने तक प्रदर्शन जारी रहेगा :
प्रदर्शनकारी सेना से बात करने की भी योजना बना रहे हैं। सरकार द्वारा कर्फ्यू और देश में फोन और इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों लोग सोमवार सुबह तहरीर स्क्वे यर पर एकत्र हुए। प्रदर्शन में शमिल लोगों का कहना है कि वे तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक मुबारक अपना इस्तीफा नहीं दे देते।
मिस्र के सबसे बड़े विपक्षी समूह मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता जमाल नासिर ने कहा कि मुबारक और उनकी नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी को अलग रखते हुए एक सर्वसम्मत सरकार के गठन के लिए उनका संगठन अल बरदई और अन्य पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है।
'नेवरहुड वॉच ग्रुप' का गठन :
इस बीच विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर लूटपाट की घटनाएं भी सामने आई हैं। कई बड़े शहरों में लोगों ने अपनी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए 'नेवरहुड वॉच ग्रुप' बनाया है। इस तरह के समूह बनने से लूटपाट की घटनाओं में कमी आई है। ऐसी भी खबरें हैं कि प्रदर्शनों का फायदा उठाते हुए हजारों कैदी जेलों से फरार हो गए हैं। काहिरा के कम-से-कम चार जेल के कैदी फरार हो चुके हैं।
विरोध प्रदर्शनों के कारण अधिकतर कारोबार के बंद रहने और लोगों के घरों में बंद रहने के कारण उनकी आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
ओबामा ने कहा, लोकतंत्र कायम होगा :ओबामा ने कहा कि उन्हें मिस्र में एक बदलाव आने की उम्मीद है और इसका अंत लोकतंत्र के रूप में होगा।
ओबामा ने मिस्र की मौजूदा स्थिति को लेकर तुर्की, इजरायल, सऊदी अरब और ब्रिटेन के नेताओं से बात की है। लेकिन अल बरदई का कहना है कि अमेरिका, मिस्र में होने वाले बदलाव में सहयोग नहीं कर रहा है जिससे उसकी विश्वसनीयता समाप्त हो रही है।ओबामा ने रविवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से बात की। इससे पहले शनिवार को उन्होंने तुर्की के प्रधानमंत्री रेसेप तय्यीप एडरेगन, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला से बात की थी। बातचीत के दौरान ओबामा ने हिंसा के खिलाफ होने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
व्हाइट हाऊस से जारी एक बयान के मुताबिक ओबामा ने मिस्र की जनता की इच्छाओं के अनुसार व्यवस्थित तरीके से सरकार में परिवर्तन की बात कही है।
विदेशी नागरिक लौट रहे स्वदेश :
अस्थिरता के बीच विदेशी नागरिक देश छोड़ने लगे हैं। यूरोपीय और अरब देशों ने अपने नागरिकों को मिस्र से बाहर निकालने के लिए सेना के विमान भेजने की बात कही है।इस बीच, पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि मिस्र के घटनाक्रमों पर नजर रखी जा रही है और हालात ज्यादा बिगड़ने पर वहां से पाकिस्तानी नागरिकों को निकाल लिया जाएगा।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मिस्र में मौजूद करीब 150 परिवारों को स्वदेश कब लाया जाएगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने रविवार को कहा, "हम काहिरा में अपने दूतावास के साथ सम्पर्क में हैं। हम वहां के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।"इस बीच चीन ने मिस्र में फंसे अपने नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए सोमवार को दो विमान भेजे। चीन के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दो विमानों ने सोमवार दोपहर मिस्र के लिए उड़ान भरी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, "चीन सरकार मिस्र में चीनी नागरिकों की सुरक्षा को विशेष महत्व देती है और उसने सम्बद्ध एयरलाइंस के साथ समन्वय कर वहां फंसे चीनी नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाने को कहा है।"
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा है कि सरकार मिस्र के हालात बिगड़ने पर वहां मौजूद नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए सेना के विमान भेजने पर विचार कर सकती है।
काहिरा में जारी विरोध प्रदर्शन के कारण न्यूजीलैंड के दूतावास का कार्यालय नहीं खुल सका। की ने कहा कि सरकार मिस्र में मौजूद न्यूजीलैंड के नागरिकों से मिस्र छोड़ देने का अनुरोध कर रही है और हरसम्भव सहायता मुहैया करवा रही है।
मंत्रिमंडल में फेरबदल को जनता ने नकारा :
मुबारक ने इस बीच कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों के पदों में फेरबदल की है। उन्होंने मंत्रिमंडल में नए लोगों को नियुक्त किए। पूर्व खुफिया प्रमुख उमर सुलेमान को उपराष्ट्रपति नियुक्त किया गया। यह पद तीन दशकों से रिक्त था। इसी तरह अहमद शफीक को नया प्रधानमंत्री बनाया गया है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मुबारक के इस कदम को काफी नहीं कहा है और उन्होंने कहा है कि मुबारक के सत्ता से हटने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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