आत्मदाह करने वाले महोबा के किसान की मौत
महोबा, 29 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद के एक गांव में अधिग्रहीत भूमि के उचित मुआवजे की मांग को लेकर आत्मदाह करने वाले किसान की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस सिलसिले में अब तक किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
जनपद के कबरई थाना के झिरसहेवा गांव में आत्मदाह करने वाले किसान की झांसी के अस्पताल में उपचार के दौरान शुक्रवार रात मौत हो गई।
महोबा के पुलिस अधीक्षक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को बताया, "अर्जुन सहायक परियोजना की मांग करने वाले झिरसहेवा गांव के किसान रामविशाल उर्फ बब्बू ने अधिग्रहीत भूमि के उचित मुआवजे की मांग को लेकर अधिकारियों की मौजूदगी में खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया था, जिसकी उपचार के दौरान झांसी मेडिकल कालेज अस्पताल में मौत हो गई।"
गौरतलब है कि झिरसहेवा गांव की कृषि भूमि इलाकाई दर 2़.75 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर प्रस्तावित थी, जबकि पड़ोसी गावों में इसके पूर्व 4़.50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया गया है। इसलिए प्रभावित किसान सात लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
किसानों ने 18 जनवरी को सत्याग्रह शुरू कर परियोजना का काम बंद करा दिया था। जिलाधिकारी वी.वी. पंत के निर्देश पर राजस्व अधिकारी शुक्रवार को समझौते के लिए बांध पर पहुंचे, लेकिन किसान रामविशाल ने उनकी ही मौजूदगी में आत्मदाह का प्रयास किया। गंभीर हालत में उसे झांसी मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस का कहना है कि राजस्व अधिकारियों के साथ किसानों का समझौता हो गया है, अब स्थिति नियंत्रण में है।
उल्लेखनीय है कि कबरई बांध के उच्चीकरण की योजना है। किसानों को आशंका है कि जलभराव से झिरसहेवा गांव की लगभग पूरी कृषि भूमि डूब जाएगी, जिससे गांव के सभी 223 किसान परिवार भूमिहीन हो जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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