तेल कीमतों में वृद्धि का बोझ उठाना होगा : मुखर्जी
मुखर्जी ने शुक्रवार दोपहर एक अनौपचारिक भोज के दौरान कहा कि तेल विपणन कम्पनियां आसमान से पैसे नहीं लाती। तेल की बढ़ी कीमत को ग्राहकों के ऊपर डालना ही होगा।
पिछले साल तेल विपणन कम्पनियों को बाजार की स्थिति के मुताबिक पेट्रोल कीमतों का निर्धारण करने की स्वतंत्रता दे दी गई थी जिसके बाद 2010 में कम्पनियों ने पांच बार कीमतों के वृद्धि की। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
यह पूछने पर कि 2008 में जब कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल थी, तो पेट्रोल की कीमत 52 रुपये थी, तो अभी पेट्रोल की कीमत इतनी क्यों बढ़ गई है। मुखर्जी ने कहा कि अभी दूसरी कई चीजों की कीमत बढ़ गई है। इसलिए पेट्रोल की भी कीमत बढ़ी है।
मुखर्जी ने कहा कि पेट्रोल को लागत से 4.17 रुपये प्रति लीटर कम और डीजल को 5.40 रुपये प्रति लीटर कम मूल्य पर बेचे जाने के कारण पूरे वित्त वर्ष में देश को कुल 65,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
मुखर्जी ने इस बात की ओर स्पष्ट इशारा किया कि इस साल तेल विपणन कम्पनियों को और अधिक सब्सिडी नहीं दी जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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