खतरे में धरती, समय से पहले खिला बुरांश का फूल
कुछ ऐसे ही खतरे के संकेत प्रकृति ने इस बार उत्तराखंड के राज्य वृक्ष बुरांश के माध्यम से हम इंसानों तक भेजे हैं। बुरांख का फूल हमेशा मार्च से अप्रैल महीने में खिलता है। यह फूल अतंयंत दुर्लभ माना जाता है। लेकिन इ स बार यह सुंदर फूल अचानक जनवरी महीने में ही अपने सौंदर्य की छटाएं बिखेर रहा है। वैज्ञानिक और पर्यावरण विद इसे जलवायु परिवर्तन का खतरा मान रहे हैं।
बुरांश अमूमन समुद्र की सतह से पांच से आठ हजार फिट की उंचाई वाले भूभाग में होता है। इस पेड़ पर करीब 15 से 20 दिन के अंदर फूल खिलने की प्रक्रिया संपन्न होती है। बुरांश का जूस हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
गोविंद बल्लभ वानिकी एवं कृषि विश्वविद्यालय रानीचौरी के पारिस्थितिकी के वरिष्ठ शोध अधिकारी वी.के. शाह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और शीतकाल में देर से बारिश होने के चलते बुरांश का फूल समय से पहले खिल गया है। उन्होंने बताया कि इस समय पर्यावरण का तापमान छह डिग्री सेल्सियस के हिसाब से बढ़ रहा है।
नागरिक सम्मानों पद्म श्री, पद्म भूषण से सम्मानित और विश्व विख्यात चिपको आंदोलन के प्रेरक चंडी प्रसाद भट्ट का कहना है कि मौसम में आ रहे बदलावों के कारण हमारी वनस्पति भी इससे प्रभावित हो रही है और इसके कारण ही बुरांश समय से पहले खिल गया है। उन्होंने कहा कि इसका असर फसल चक्र पर पड़ने के साथ ही जीव जंतुओं पर भी पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में वनस्पतियां धीरे धीरे लुप्त होने लगी हैं। उन्होंने इस बारे में शोध किए जाने की बात कही।













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