जब ज्योतिषी नहीं तो पीएम क्यों बने हैं मनमोहन सिंह?

बैंगलुरू । कहते है घर का मुखिया वो होता है जो घर का सबसे समझदार और वरिष्ठ इंसान होता है। जिसके अंदर ये कूबत होती है कि वो घर की सारी जिम्मेदारी आसानी से निभा सके, वो भी बिना किसी परेशानी के। हमारा देश भी तो एक परिवार ही है जिसकी कमान हमारे देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथ में हैं, जिनके ऊपर हमार पूरी जनता की जिम्मेदारी हैं, लेकिन क्या वो इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं? मेरी तरह आपका भी जवाब होगा नहीं।

कमर तोड़ती मंहगाई से आज देश का हर वर्ग परेशान हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि किसी को कम तो किसी को ज्यादा महंगाई तंग कर रही है। लेकिन हमारे पीएम साहब हमेशा की तरह मौन बैठे है। वर्षो तक देश के फांइनेस डिपार्टमेट को संभालने वाले मनमोहन सिंह को देखकर लगता है कि वो इकोनॉमी की ए, बी, सी, डी तक भूल गये हैं।

तभी तो वो ऐसे बयान दे रहे हैं जिन्हें सुनकर आपको उन पर हैरत और गुस्सा दोनों आयेगा। गौरतलब है कि मनमोहन सिंह ने महंगाई के बारे में कहा है कि मार्च तक कीमतों में स्थिरता आ जाएगी, लेकिन वो कोई भविष्यवक्ता या ज्योतिषी नहीं है जो पूरी तरह हालात बदल दें। आपको बता दें दिसंबर, 2010 में सकल मुद्रास्फीति 8. 43 प्रतिशत पर पहुंच गई है, उधर, एक जनवरी को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 16.91 प्रतिशत के स्तर पर थी।

अब सवाल ये उठता है कि अगर हर कोई काबिल होता तो क्या वो देश की समस्याओं से निपट नही लेता, आप पीएम की कुर्सी पर बैठे हुए है,और इस तरह की बयान बाजी कर रहे हैं। अगर आप से जिम्मेदारी नहीं संभल रही तो आप कुर्सी से उतर जाइये, कोई और आकर देश की समस्या से निपटेगा। सौ टके का प्रश्न ये है कि आखिर महंगाई अनियंत्रित क्यों हुई? क्या इसका जवाब पीएम साहब देंगे।

हाल ही के दिनों में प्याज के दामों ने पूरी संसद को रूला दिया लेकिन क्या पीएम साहब के खाने की प्लेट से सलाद गायब हुआ है? क्या मनमोहन सिंह ने कभी बढ़ते दामों की वजह से अपनी चमकती राजनैतिक गाड़ी को छोड़कर पैदल चलने की कोशिश की है ? कल तक ऑटो से चलने वाला आम आदमी आज बसों में धक्के खा रहा है, तो वहीं कल तक बस में सफर करने वाला आम इंसान आज पैदल चलने को मजबूर है क्योंकि तेल के बढ़े दामों ने उसका बजट गड़बड़ा दिया है।

लेकिन मनमोहन सिंह क्या जाने आम आदमी का दर्द, लोग सवाल करते है तो बिगड़ कर कहते है कि वो कोई भविष्यकर्ता नहीं हैं। अरे आप से कोई नहीं कह रहा कि आप कोई भविष्यवाणी कीजिए, आपसे तो हम केवल कुछ समाधान मांग रहे हैं क्योंकि आप पीएम हैं। हम किसी आम आदमी से अपनी समस्या नहीं कह रहे क्योंकि हमें पता है वो कुछ नहीं कर सकता है, जो करना है वो आप करेंगे क्योंकि आप पीएम हैं? अब आप सोचिए कि आप ज्योतिष बनना चाहते है या प्रधानमंत्री या एक आम आदमी, फैसला आप पर...

आपका क्या कहना है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस बयानबाजी पर, अपनी राय नीचे लिखे कमेंड बॉक्स में दर्ज करायें।

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