मिर्चपुर हिंसा की सीबीआई जांच के लिए हरियाणा में आंदोलन जारी

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जींद। हरियाणा के हिसार जिले के मिर्चपुर गांव में पिछले वर्ष हुई जातीय हिंसा पर कुछ मांगों के चलते रविवार को लगातार दूसरे दिन भी जाट समुदाय का रेल रोको अभियान जारी है। जींद रेलवे स्टेशन के पास जुलानी गांव में जाट महापंचायत के सदस्य शनिवार से पटरी पर बैठे हुए हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। समुदाय ने मांग पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। खाप के नेता राजबीर ढांडा ने कहा, "हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हम यहां से हटने वाले नहीं हैं।"

प्रदर्शनकारी इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के अलावा इसकी सुनवाई भी दिल्ली से हिसार स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, गिरफ्तार किए गए जाट युवकों को रिहा करने की भी मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में गैरसरकारी संगठन यूथ लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख संदीप सिंह ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल के नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर जाट समुदाय के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

प्रदर्शन के कारण नई दिल्ली-फिरोजपुर मार्ग पर चलने वाली रेलगाड़ियों को नरवाना से कुरुक्षेत्र की ओर मोड़ दिया गया है। एक रेल अधिकारी ने बताया, "रेलगाड़ियों के मार्गो में बदलाव कर वैकल्पिक रास्तों से चलाया जा रहा है। इस नाकेबंदी की वजह से लम्बी दूरी की अधिकतर रेलगाड़ियां निर्धारित समय की देरी से चल रही हैं।"

इस बीच पूरे जींद जिले में तनाव बना हुआ है क्योंकि प्रदर्शकारियों ने अपनी मांगें पूरी न होने की सूरत में आंदोलन तेज करने की धमकी दी है। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा बलों की 45 कम्पनियों को तैनात किया है। सभी संवेदनशील जगहों पर भी भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात है।

पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। इस मामले में जाट समुदाय के कुल 98 युवक गिरफ्तार किए गए थे और उन सभी को दिल्ली की जेल में रखा गया है। जींद के पुलिस अधीक्षक ने बताया, "अभी तक तो प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। हम उन पर लगातार नजर रख रहे हैं। किसी भी आपात स्थित से निपटने के लिए पुलिस ने व्यापक बन्दोबस्त किए हैं।"

उल्लेखनीय है कि पिछले साल मिर्चपुर गांव उस समय सुर्खियों में आया था जब जाट समुदाय के लोगों ने दलितों के मकानों को आग लगा दी थी। इसमें एक 70 वर्षीय बुजुर्ग और उसकी 18 वर्षीया विकलांग बेटी की जलकर मौत हो गई थी। जाट महापंचायत ने राज्य सरकार से 15 जनवरी तक मांग स्वीकार करने की मोहलत दी थी। गौरतलब है कि पिछले साल 21 अप्रैल को मिर्चपुर में हुई घटना के बाद 150 दलित परिवारों ने गांव छोड़ दिया था। हमले में कम से कम 18 मकानों को आग लगा दी गई थी।

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