क्या है सबरीमाला से दिखने वाला 'मकरज्योति'

चलिए हम आपको इन सवालों के उत्तर देते हैं। असल में मकर ज्योति एक तारा है, जो आसानी से नहीं दिखता। इस पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र स्थल पर मकर संक्रांति के दिन मकर ज्योति तारे की रौशनी पड़ती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य एवं आलौकिक तारे के प्रकाश में पूजन-अर्चना करने से जीवन में खुशियां आती हैं। सारे दुख दूर हो जाते हैं। इस प्रकाश को मकरविलाकु यानी मकर का प्रकाश भी कहते हैं। लोगों का मानना है कि यहां पर ईश्वर की सीधी दृष्टि पड़ती है।
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यही कारण है कि देश भर से श्रद्धालु यहां पर मकर संक्रांति के दिन आते हैं। पिछले साल मकर संक्रांति के दिन यहां पर मकर ज्योति को देखने 15 लाख श्रद्धालु आए थे। यही नहीं हर साल यहां करोड़ों रुपए का चढ़ावा चढ़ता है। आंकड़ों के मुताबिक 2008 में यहां 72.52 करोड़ रुपए का चढ़ावा चढ़ा था। पिछले साल मकर संक्रांति के दिन यहां 72.35 करोड़ रुपए का चढ़ावा चढ़ा।
यदि यहां पर हुए हादसों की बात करें तो 14 जनवरी 1999 में यहां भूस्खलन हुआ था, जिसमें 25 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। उस दौरान भी लाखों लोग मकरज्योति तारे को देखने के लिए पहाड़ की चोटी पर चढ़े थे। इस साल यानी 14 जनवरी 2011 को उससे भी बड़ा हादसा हुआ। चोटी से करीब 35 किलोमीटर दूर एक जीप अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं के बीच घुस गई, जिससे भगदड़ मच गई। सकरा रास्ता होने के कारण तमाम लोग पहाड़ी से नीचे भी गिर गए।












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