श्रीलंकाई उच्चायुक्त तलब, भारत का कड़ा विरोध
नई दिल्ली/कोलम्बो/चेन्नई। श्रीलंका ने गुरुवार को अपनी नौसेना द्वारा तीन भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी करने की घटना से इंकार किया। इस गोलीबारी में एक मछुआरे की जान चली गई। उधर, तमिलनाडु सरकार के दबाव में आए भारत सरकार ने इस घटना के लिए श्रीलंका से कड़ा विरोध जताया और उसे बल का इस्तेमाल करने से बचने के लिए कहा।
श्रीलंकाई नौसेना के जवानों द्वारा एक भारतीय मछुआरो की हत्या पर चिंता जताने के लिए विदेश मंत्रालय ने श्रीलंका के उच्चायुक्त प्रसाद करियावसम को साउथ ब्लॉक तलब किया और कहा कि ऐसी घटनाओं में बल का इस्तेमाल करने से बचा जाना चाहिए। करियावसम ने श्रीलंका के प्रभारी संयुक्त सचिव टी.एस. त्रिमुति से मुलाकात की। समझा जा रहा है कि उन्होंने मामले की जांच की पेशकश की।
बैठक के बाद करियावसम ने पत्रकारों को बताया, "श्रीलंकाई नौसेना का कहना है कि वह इस इलाके में मौजूद नहीं थी और उन्होंने कोई गोलीबारी नहीं की। चूंकि हमें शिकायत मिली है, हम इसकी जांच कर रहे हैं।"
ज्ञात हो कि गत बुधवार को श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु तट के समीप समुद्र में तीन भारतीय मछुआरों पर कथित रूप से गोलीबारी की। इसमें एक मछुआरे वीरपांडियन की मौत हो गई। जानकार सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि उच्चायुक्त ने भारतीय अधिकारियों से कहा कि जहां गोलीबारी की घटना हुई उसके समीप श्रीलंकाई नौसेना मौजूद थी।
श्रीलंका नौसेना प्रवक्ता कैप्टन अथूला सेनार्थ ने कोलम्बो में पत्रकारों को बताया, "इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।" तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उनसे 'व्यक्तिगत हस्तक्षेप' करने की मांग के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
श्रीलंका में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त अशोक कांथा ने इस मामले को श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया और एक भारतीय मछुआरे की कथित हत्या पर 'गहरी चिंता और दुख' जताया।
नई दिल्ली ने कोलम्बो से कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में गोलीबारी करने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही श्रीलंका के अधिकारियों से बल प्रयोग न करने के लिए कहा गया है। मछुआरे की हत्या पर भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया करुणानिधि के बढ़ते दबाव के बाद आई है। करुणानिधि ने भारत सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को भेजे अपने तार में करुणानिधि ने कहा, "दोनों देशों की सरकारों द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद श्रीलंकाई नौसेना का अत्याचार जारी है।" उन्होंने कहा, "गोलीबारी और हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के लिए इस घटना को श्रीलंका की सरकार के समक्ष उठाया जाना चाहिए। इस तरह की हत्याओं पर रोक लगाने के लिए आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया जाता है।"
वीरपांडियन हत्या का मामला राज्य विधानसभा में भी उठा। उप मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि नई दिल्ली के साथ इस मामले को उठाने के बाद भी हत्याओं का दौर जारी है। स्टालिन विभिन्न पार्टियों द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित मछुआरे के परिजनों को 500,000 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि नागपट्टिनम जिले के वीरपांडियन सहित चार अन्य मछुआरे बुधवार को यहां से 15 समुद्री मील की दूरी पर मछली पकड़ रहे थे, तभी श्रीलंकाई नौसेना ने उन पर गोलीबारी की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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