अर्थव्यवस्था पर ओबामा आशान्वित

दो साल पहले आए आर्थिक संकट से अमरीका अब भी जूझ रहा है और ऐसे में अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत राष्ट्रपति ओबामा के लिए काफ़ी मायने रखते हैं.कांग्रेस यानी संसद के निचले सदन में अब रिपब्लिकन का बहुमत है और उसका राष्ट्रपति ओबामा पर सरकारी नौकरियों और खर्चों में कटौती का दबाव है.सरकार ने अभी गुरुवार को ही रक्षा बजट में 78 अरब डॉलर की कटौती का ऐलान किया है.
इसलिए इन दिनों छोटी सी सकारात्मक ख़बर भी राष्ट्रपति के लिए बड़ी साबित हो सकती है.उन्होंने मेरीलैंड प्रांत में एक फ़ैक्ट्री के दौरे के दौरान कहा है कि आर्थिक स्थिति सुधर रही है.उनका कहना था रुझान साफ़ है क्योंकि नई नौकरियों का सिलसिला शुरु हो गया है.उन्होंने कहा, "पिछले महीने अर्थव्यवस्था से एक लाख से अधिक नौकरियाँ जुड़ीं और बेरोज़गारी काफ़ी कम हुई. हमें मालूम है कि ये आंकड़े हर महीने बदलते रहेंगे लेकिन रुझान साफ़ है. हमने देखा कि पिछले 12 महीनों में निजी क्षेत्र में नौकरियाँ बढ़ी हैं और ऐसा वर्ष 2006 के बाद पहली बार हुआ है."
उनका कहना था, "अर्थव्यवस्था में पिछले साल 13 लाख नई नौकरियाँ पैदा हुईं. हर तिमाही पिछली तिमाही से बेहतर थी. इसका मतलब यह हुआ कि नई नौकरियाँ पैदा होनी शुरु हो गई हैं."ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, राष्ट्रपति ओबामा ने अपनी टीम में कुछ परिवर्तन भी किए हैं.केंद्रीय बैंक के चेयरमैन हालांकि रोज़गार के मामले में राष्ट्रपति से इत्तेफ़ाक नहीं रखतेजीन स्पर्लिंग अब राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के अध्यक्ष होंगे. उनका आर्थिक क्षेत्र में काफ़ी लंबा अनुभव है.राष्ट्रपति अपनी आर्थिक टीम में कुछ नए चेहरे भी लेकर आए हैं.
हालांकि राष्ट्रपति ओबामा नौकरियों के आंकड़ों को लेकर प्रसन्न हैं लेकिन उनके भाषण के ज़रा पहले अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व के चेयरमैन बेन बेर्नेन्के ने सीनेट के सामने दिए गए एक बयान में कहा कि नौकरियों के अवसर उतनी तेज़ी से पैदा नहीं हो पा रहे हैं जितने होने चाहिए.उनके अनुसार बेरोज़गारी की दर को सामान्य स्तर तक लाने में काफ़ी समय लग सकता है.दोनों अपनी जगह सही हैं लेकिन अंतर यह है कि राष्ट्रपति सकारात्मक नज़र आते हैं लेकिन फ़ेडरल रिज़र्व के चेयरमैन ज़्यादा उत्साहित नहीं हैं.
अमरीकी राजनीति पर अगले दो सालों तक यानी राष्ट्रपति पद के अलगे चुनाव तक अर्थव्यवस्था की प्रगति का मुद्दा छाया रहेगा.रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य अब कांग्रेस को नियंत्रित करते हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर राष्ट्रपति ने सरकारी ख़र्च कम नहीं किया और बजट घाटे को कम नहीं किया तो वो सरकार को किसी तरह का सहयोग नहीं देंगे.












Click it and Unblock the Notifications