एमक्यूएम ने सत्ताधारी गठबंधन छोड़ा
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने जिंस उत्पादों की मूल्यवृद्धि के विरोध में रविवार को औपचारिक तौर पर घोषणा की कि वह गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस लेती है। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने हालांकि कहा कि इससे उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। टेलीविजन चैनल जियो टीवी के मुताबिक पार्टी की समन्वय समिति ने कराची और लंदन में साथ-साथ बैठक की और उसके बाद यह फैसला लिया।
बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य पदार्थो के दामों वृद्धि को गंभीरता से लिया गया।प्रधानमंत्री गिलानी ने एमक्यूएम के इस फैसले पर लाहौर में संवाददाताओं से कहा कि सरकार नियमित रूप से अपना कामकाज करती रहेगी। भले ही कोई पार्टी समर्थन वापस ले ले।उल्लेखनीय है कि एमक्यूएम ने एक सप्ताह पहले सरकार से समर्थन वापस लेने का संकेत दे दिया था। अलग होने के फैसले से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सरकार को तगड़ा झटका लगा है। इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल(जेयूआई-एफ) सरकार से समर्थन वापस ले चुकी है।
एमक्यूएम ने यह फैसला जेयूआई-एफ द्वारा सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के एक सप्ताह बाद लिया है। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने जेयूआई-एफ के सदस्य आजम स्वाती को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के पद से हटा दिया था।एमक्यूएम ने सरकार को 10 दिनों का समय देकर सिंध के गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा के बयान पर स्पष्टीकरण मांगा था। मिर्जा ने एमक्यूएम पर कराची में फिरौती वसूलने और हत्या करवाने का आरोप लगाया था।
एमक्यूएम के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री गिलानी से इस सम्बंध में मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया था लेकिन समय सीमा खत्म होने तक कोई कदम नहीं उठाए जाने के कारण एमक्यूएम ने गठबंधन छोड़ने का फैसला किया।जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान ने 21 दिसम्बर को पार्टी के बाकी चार मंत्रियों का इस्तीफा सौंप दिया था और सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
पीपीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन से इन दो पार्टियों के बाहर होने पर गठबंधन को संसद में विश्वास मत प्राप्त करने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।












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