न्यायाधिकरण का फ़ैसला, आंध्र को सबसे अधिक पानी

निर्णय के अनुसार कुल उपलब्ध पानी में से आंध्र प्रदेश को 1001 टीएमसी (थाउजेंट मिलियन क्यूबिक फ़ीट) पानी की आपूर्ति की जाएगी जबकि कर्नाटक को 911 और महाराष्ट्र को 666 टीएमसी जल की आपूर्ति की जाएगी.नदी के अतिरिक्त जल से कर्नाटक को 177 टीएमसी, महाराष्ट्र को 81 टीएमसी और आंध्र प्रदेश को 190 टीएमसी पानी की आपूर्ति की जाएगी.न्यायाधिकरण में कर्नाटक के वकील ब्रजेश कडप्पा ने फ़ैसले के बाद कहा कि जहाँ तक अल्माडी बाँध की ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति हमें मिली है,हम उसका स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि फ़ैसले में कई बातें स्वागत योग्य है.
ऊंचाई को लेकर विवाद
उल्लेखनीय है कि अल्माडी बांध की ऊंचाई को लेकर भी विवाद था और आंध्र और महाराष्ट्र राज्यों इसकी ऊंचाई बढ़ाने का विरोध कर रहे थे.उनका कहना था कि ऊंचाई बढ़ाने से उन्हें पानी की आपूर्ति कम हो जाएगी और गाँवों के डूबने का ख़तरा पैदा हो जाएगामहाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राम राजे निंबालकर का कहना था कि वो फ़ैसले का अध्ययन कर रहे हैं.उनका कहना था कि अतिरिक्त पानी तीनों राज्यों के बीच बंटेगा और एक समिति इसकी निगरानी करेगी जो एक अच्छी बात है. हालांकि उन्होंने पूरे फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने अप्रैल, 2004 में जल विवाद अधिनियम के तहत कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था.तीन सदस्यीय इस न्यायाधिकरण की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के अवकाशप्राप्त जज ब्रजेश कुमार कौ सौंपी गई थी.उनके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाशप्राप्त जज एसपी श्रीवास्तव और कोलकाता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज डीके सेठ इसके सदस्य थे.












Click it and Unblock the Notifications