गुर्दे के बदले जेल से रिहाई

दोनों बहनों को 1994 में 16 साल पहले एक चोरी में शामिल होने के सिलसिले में जेल हुई थी और आरोप था कि दो व्यक्तियों से 11 डॉलर छीने गए थे.उस समय बहनों की 19 और 22 साल की थीं और दोषी पाए जाने पर उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा हुई.अब बड़ी बहन जेमी स्कॉट का गुर्दा काम करना बंद कर चुका है और उसे नियमित रूप से डायलसिस की ज़रूरत है और साथ ही प्रतिरोपण की भी.
कड़ी सज़ा?
इनदिनों स्कॉट बहनों का मामला सुर्ख़ियों में है. इसकी एक वजह जेमी की ख़राब सेहत और जेल में उचित इलाज न हो पाना है.लेकिन इससे भी ज़्यादा बहस इस बात को लेकर है कि क्या दोनों को अपने जुर्म के लिए कुछ ज़्यादा ही कड़ी सज़ा नहीं दी गई. कई संस्थानों ने इस सज़ा की आलोचना की थी.अब मिसीसिपी के गवर्नर हेली बारबर ने नई पेशकश कर मामले को नया मोड़ दे दिया है. हालांकि उन्होंने अपने शब्दों का चयन काफ़ी सावधानीपूर्वक किया है.
गर्वनर ने ये नहीं कहा है कि वे दोनों बहनों को माफ़ी दे रहे हैं या सज़ा ख़त्म कर रहे हैं.बल्कि उन्होंने ये कहा है कि वे दोनों की सज़ा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर रहे हैं क्योंकि अब ये बहनें समाज के लिए ख़तरा नहीं है.लेकिन अगर ग्लेडिस अपनी बड़ी बहन को गुर्दा नहीं देती हैं तो उन्हें जेल में वापस आने के लिए कहा जा सकता है.हालांकि वकीलों का कहना है कि ऐसी नौबत ही नहीं आएगी क्योंकि ग्लेडिस ने ख़ुद इस बात की पहल की है कि वे अपनी बहन को गुर्दा देना चाहती हैं.
.












Click it and Unblock the Notifications