इराक में हिंसा रोज की बात

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ में मारे गए लोगों की सही संख्या बता पाने का दावा तो कोई नहीं कर सकता. लेकिन इस विवादित मामले में आईबीसी ने ख़ुद को एक सम्मानजनक संस्था के रूप में स्थापित किया है जिसका हवाला अकसर दिया जाता है. इराक़ बॉडी काउंट का वार्षिक लेखा-जोखा ये बात दोबारा याद दिलाता है कि भले ही 2006-07 की तुलना में हिंसा का स्तर कम हुआ हो लेकिन इराक़ मे अब भी रोज़ाना लोगों की हत्या हो रही है.
'हर रोज़ मरते हैं लोग'
रिपोर्ट के मुताबिक हर रोज़ औसतन दो बम इराक़ में कहीं न कहीं फटते ही हैं जिसमें कम से कम चार लोग मारे जाते हैं.2003 के बाद से अब तक 4470 गठबंधन सैनिकों की भी मौत हो चुकी है. इराक़ बॉडी काउंट अपनी रिपोर्ट में ये तो कहता है कि 2010 में मृतकों की संख्या कम हुई है लेकिन संस्था का ये भी कहना है कि स्थिति में सुधार की रफ़्तार कम हो गई है.
वैसे इस सब के बीच एक सकारात्मक ख़बर भी है. अगस्त में इराक़ से ज़्यादातर अमरीकी सैनिक वापस चले जाने के बाद हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या पहले के मुकाबले तेज़ी से कम हुई है.वर्ष 2003 के बाद से इराक़ में दिसंबर 2010 में सबसे कम हिंसा हुई है. अगस्त के बाद अब इराक़ में केवल 50 हज़ार अमरीकी सैनिक हैं जो 'सलाहकार" की भूमिका निभा रहे हैं.
इराक़ बॉडी काउंट विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के आँकड़ों को देखता है, कोई शव मिलने की ख़बर पर प्रत्यक्षदर्शियों से बात करता है, अधिकारियों से इंटरव्यू करता है या फिर मुर्दाघर में कर्मचारियों से बात करता है.इस तरह संस्था इराक़ में मारे गए लोगों की संख्या के आँकड़े इक्ट्ठा करती है. संस्था का कहना है कि 2003 के बाद से इराक़ में हुई हिंसा में कुल एक लाख आठ हज़ार तीन सौ अट्ठानबे (108398) लोग मारे जा चुके हैं. जबकि इराक़ी सरकार के आँकड़ें काफ़ी कम हैं.












Click it and Unblock the Notifications