धांधली करने वाला बैंककर्मी गिरफ़्तार

राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गाँव की सिटी बैंक शाखा में इस धांधली के बारे में इसी महीने की शुरुआत में पता चला था.बैंक ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि वास्तव में शिवराज पुरी ने कुछ और लोगों के साथ मिलकर कुल कितने रुपए का घोटाला किया है.बैंक के अधिकारियों का कहना है कि शिवराज पुरी ने कुछ निवेशकर्ताओं को एक फ़र्ज़ी निवेश योजना के ज़रिए भारी भरकम राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया.
इस राशि को उन्होंने अपने और तीन रिश्तेदारों के नाम से खोले गए संयुक्त खाते में जमा करवा लिया.फिर इस राशि को उन्होंने कथित तौर पर शेयर बाज़ार सहित अन्य स्थानों पर निवेश कर दिया.बताया गया है कि उन्होंने निवेशकों को, जिनमें से ज़्यादातर प्रवासी भारतीय हैं, अधिक ब्याज़ सहित कई अन्य लाभ मिलने का प्रलोभन दिया था.पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के बाद शिवराज पुरी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा, "मैंने पुलिस को सारी जानकारियाँ दे दी हैं. मेरा न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सच सामने आ जाएगा."
अधिकारियों का कहना है कि इस धांधली का पता तब चला जब बैंक के एक ग्राहक ने एक वरिष्ठ प्रबंधक से इस योजना का ज़िक्र किया.इसके बाद बैंक ने जाँच की और धांधली का पता चलने के बाद पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज करवाई गई.पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर, 2009 के बाद से बैंक खाते से पैसे निकाले गए.












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