संबंधों में गर्मजोशी, ईरान-पाक पर मतभेद भी

संबंधों में गर्मजोशी, ईरान-पाक पर मतभेद भी
विकीलीक्स ने भारत से जुड़े दस्तावेज़ जारी किए हैं जिसमें एक ओर भारत-अमरीका के सुधरते संबंधों का ज़िक्र है तो दूसरी ओर ईरान, पाकिस्तान और बर्मा जैसे मुद्दों पर मतभेद भी सामने आते हैं.

दस्तावेज़ों में कहा गया है कि मई 2008 में तत्कालीन विदेश सचिव शिव शंकर मेनन और तत्कालीन अमरीकी राजदूत डेविड मल्फ़र्ड में तीख़ी नोकझोंक हुई थी जब ईरान के राष्ट्रपति कुछ समय के लिए दिल्ली रुके थे.

विकीलीक्स की मानें तो मेनन ने साफ़ शब्दों में कहा दिया था कि अमरीका भारत को ये न बताए उसे क्या करना है, ख़ासकर सार्वजनिक मंच पर. बर्मा को लेकर भी अमरीका भारत के रुख़ से ख़ुश नहीं है और अमरीका चाहता है कि भारत बर्मा के सैन्य नेतृत्व के प्रति दोस्ताना रवैया न रखे.

संदेशों में पिछले साल मेनन और रिचर्ड बाउचर की मुलाक़ात का भी ज़िक्र है जिसमें बाउचर कहते हैं कि भारत को जलवायु जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जबकि मेनन स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि भारत के लिए पाकिस्तान सबसे अहम मुद्दा है.

संदेशों के मुताबिक भारत को लगता है कि अमरीका पाकिस्तान पर नरम रुख़ अपनाता है और पाकिस्तान को लशकरे-तैबा की गतिविधियाँ बंद करनी होगी. भारत यहाँ तक कहता है कि अगर 'मलेरिया से छुटकारा पाना है तो दलदल को ख़त्म करना होगा'. कश्मीर, आतंकवाद और परमाणु मुद्दे पर दोनों देश सहमत भी हैं पर इन्हीं मुद्दों पर विचार अलग-अलग भी हैं.

सोनया-करात पर रुख़

दस्तावेज़ों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया की क्षमताओं की तारीफ़ की गई है तो ये कहकर आलोचना भी की गई है कि जब भारत-अमरीका परमाणु मुद्दे पर गतिरोध था तो वे पार्टी को उम्दा नेतृत्व नहीं दे पाईं और कड़ा रुख नहीं अपना पाईं.

मनमोहन सिंह को जहाँ दस्तावेज़ों में अमरीका का दोस्त बताया गया है वहीं वामपंथी दलों के प्रति अमरीका का रुख़ बेहद कड़ा है जो परमाणु-अमरीका परमाणु संधि के ख़िलाफ़ रहे हैं. प्रकाश करात के लिए तो 'एक्सटॉर्शनिस्ट" शब्द का इस्तेमाल किया गया है.

अमरीकी दूतावास ने रिचर्ड होलब्रुक को 2009 में भेजी रिपोर्ट में कहा है, “हालांकि पिछले 40 वर्षों में भारत ने अमरीका को शक़ की नज़र से देखा है. लेकिन हाल में दोनों देशों के संबंधों में सुधार के बाद रत अब सहयोग के लिए ज़्यादा इच्छुक है जो अमरीकी हितों के लिए अच्छी बात है."

जहाँ तक भारत की बात करें तो संदेशों के मुताबिक भारत सैन्य मदद और आतंकवाद से लड़ने के लिए तकनीकी मुद्दों, और साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट जैसे मसलों पर अमरीका से सहयोग चाहता है.

भारत-अमरीका संबंध

कूटनियक संदेशों में बार-बार ये बात भी झलकती है कि भारत और अमरीका के बीच बढ़ती नज़दीकी को कुछ हद तक छिपा कर रखना पड़ रहा है क्योंकि भारत में बहुत से लोग अब भी अमरीका को शक़ की नज़र से देखते हैं.

एक संदेश में कहा गया है कि भारतीय अधिकारी सार्वजनिक तौर पर ये नहीं मानना चाहते कि अमरीका और भारत विदेश सचिव पर नज़दीकी सहयोगी हैं. विकीलीक्स ने नई दिल्ली से करीब चार हज़ार संदेश जारी किए हैं जिसमें अमरीकी कूटनयिकों ने भारत में नौकरशाही और भ्रष्ट राजनेताओं की आलोचना की है.

पर ये भी कहा है कि अगर भारत के प्रति सुलह का और सम्मानपूर्ण रवैया अपनाया जाए तो इसका फ़ायदा अमरीका को मिलेगा. प्रताड़ना, भ्रष्टाचार और सामाजिक समस्याओं पर चिंताओं के बावजूद अमरीका भारत की विविधता और लोकतांत्रिक प्रणाली से काफ़ी प्रभावित है.

इसके आलवा दस्तावेज़ों में 2006 में सोनिया गांधी और मारिया श्रिवर के बीच मुलाक़ात का भी ज़िक्र है जो एक घंटे से भी ज़्यादा समय चली. अमरीकी अधिकारी भारत पर सोनिया गांधी की जानकारी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंताओं से काफ़ी प्रभावित नज़र आए. मारिया श्रिवर आर्नल्ड श्र्वाज़्नेगर की पत्नी हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+