हिंदू कट्टरपंथ बड़ा ख़तरा: राहुल

विकीलीक्स की ओर से जारी किए गए दस्तावेज़ों के हवाले से ब्रितानी अख़बार द गार्डियन ने यह ख़बर छापी है. विकीलीक्स के मुताबिक़ राहुल गांधी ने ये बातें पिछले साल अमरीकी राजदूत के साथ एक लंच के दौरान कही थी.
भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री पद के तगड़े दावेदार माने जाने वाले राहुल गांधी ने अमरीकी राजदूत टिमूथी रोमर को चेतावनी देते हुए कहा था कि भारत के कुछ मुस्लिम समुदायों में चरमपंथी गुट लश्कर-ए-तैबा के समर्थन के सबूत हैं लेकिन देश के लिए बड़ा ख़तरा कट्टरपंथी हिंदू गुटों का बढ़ना है, जो मुस्लिम समुदाय के साथ धार्मिक तनाव और राजनीतिक टकराव पैदा करते हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे 40 वर्षीय राहुल गांधी ने रोमर से कहा था- पाकिस्तान स्थित गुटों की ओर से या भारत स्थित इस्लामी गुटों की ओर से होने आतंकवादी हमलों पर प्रतिक्रिया दे रहे देसी कट्टरपंथी गुट चिंता का विषय बन रहे हैं और इस पर लगातार नज़र रखने की आवश्यकता है.
अमरीकी राजनयिकों के बीच भेजे गए एक अन्य संदेश में राहुल गांधी की राजनीतिक अनुभवहीनता और लगातार कई भूलों का भी ज़िक्र है. इस संदेश में राजनीतिक समीक्षकों और पत्रकारों की ओर से होने वाली राहुल गांधी की आलोचना का भी उल्लेख किया गया है.
अमरीकी अधिकारियों ने राहुल की प्रशंसा की लेकिन लगता यही है कि समय के साथ अमरीकी प्रशासन की धारणा राहुल गांधी के प्रति बदली. एक अन्य अमरीकी अधिकारी से अपनी मुलाक़ात में राहुल गांधी ने ग्रामीण आबादी और छोटे कस्बों को अपनी रणनीति में शामिल करने की बात कही थी.
इस पर अमरीकी अधिकारी उनसे काफ़ी प्रभावित हुए थे. इस अधिकारी ने कहा था- वे एक ऐसे मँझे हुए राजनेता की तरह सामने आए जो अपना संदेश लोगों तक पहुँचाना जानता है. वे काफ़ी स्पष्टवादी थे, जिसने अपनी छाप छोड़ी और नौसिखिया छवि को ग़लत साबित कर दिया.
पिछले साल नवंबर में अमरीकी राजदूत से राहुल गांधी की मुलाक़ात के बाद अमरीका भेजे गए एक संदेश में कहा गया कि पहले राहुल गांधी से संपर्क करना मुश्किल समझा जाता था, लेकिन अब वे अमरीकी सरकार से संपर्क के इच्छुक हैं.
इस साल फरवरी में भेजे गए एक संदेश में उन्हें लगातार दृढ़ होता व्यक्ति कहा गया था. पिछले साल राहुल गांधी के साथ लंच के बाद अमरीका राजदूत रोमर ने लिखा था- राहुल गांधी जैसे युवा नेताओं के बढ़ते कद के कारण अमरीका के पास ये मौक़ा है कि वो दीर्घकालिक नीतियों को ध्यान में रखते हुए अपना समर्थन बढ़ाए.












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