अफगानिस्तान छोड़ने की नाटो की समय सीमा पर सहमति

NATO soldier
लिस्बन। अफगानिस्तान के नेताओं, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और उनके गठबंधन ने शनिवार को वर्ष 2011 की शुरुआत से पश्चिमी फौजों को वहां से निकालने की एक योजना को स्वीकृति दे दी। नेताओं ने अफगानिस्तान से सेनाएं बुलाने के बाद भी उसे सहयोग देने का वादा किया।

समाचार एजेंसी 'डीपीए' ने नाटो के नेतृत्व वाले 'इंटरनेशनल सेक्युरिटी असिस्टैंस फोर्स' (आईएसएएफ) के हवाले से बताया कि नाटो के 28 देशों और उसके सहयोगी 20 देशों के 130,000 सैनिक अफगानिस्तान में मौजूद हैं। गत नौ वर्षो से चल रहे युद्ध के बाद ये देश अपनी सेनाओं की वहां से वापसी चाहते हैं। नाटो महासचिव एनर्स फो रासमुसेन ने कहा, "लिस्बन में हमने आज एक ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत की है जिससे अफगानिस्तान के लोगों के पास उनके घर का मालिकाना हक होगा।"

उन्होंने बताया कि पहले प्रांत का नियंत्रण अफगानिस्तान को जुलाई तक सौंपा जा सकता है। अफगानिस्तान के खतरे वाले इलाकों में वर्ष 2014 तक नाटो की सेनाएं मौजूद रह सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा, "हमें वास्तविकताओं के आधार पर फैसला लेना चाहिए, कार्यक्रमों के अनुसार नहीं। शांति कायम करने के लिए कोई सरल उपाय नहीं है।"

सम्मेलन में नाटो देशों ने वादा किया कि वे वर्ष 2014 के बाद भी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई को अपना सहयोग जारी रखेंगे। सम्मेलन में रासमुसेन और करजई ने नाटो और अफगानिस्तान के बीच एक 'दीर्घकालिक सहयोग' शुरू करने के संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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