'भारतीय जरूरतों के मुताबिक हों प्रबंधन संस्थानों के पाठ्यक्रम'
यह बयान मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी. पुरंदेश्वरी ने यहां रविवार को दिया।
भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता (आईआईएम-सी) के रजत जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थानों में दी जाने वाली शिक्षा विकसित पश्चिमी देशों के लिए अधिक उपयोगी होती हैं और भारत के लिए वह कम प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रबंधन शिक्षा के आलोचकों का मानना है कि यह सिर्फ मुनाफा कमाने वाले पेशेवर तैयार करती है और समाज के विकास में इसकी कम रुचि होती है। हालिया कॉरपोरेट घोटाला ने प्रबंधन शिक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आईआईएम-सी विश्व का श्रेष्ठ प्रबंधन शिक्षा संस्थान बनने की राह पर आगे बढ़ते हुए आगामी शैक्षिक सत्र से दो डिग्रियों वाला दो वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। यह पाठ्यक्रम वह यूरोप के एक अग्रणी प्रबंधन संस्थान 'ईकोल सुपीरियर डि कॉमर्स डि पेरिस' के साथ मिलकर शुरू कर रहा है।
आईआईएम-सी के निदेशक शेखर चौधरी ने कहा कि अपनी तरह के इस पहले प्रबंधन कार्यक्रम में दोनों ही संस्थान अपनी-अपनी डिग्रियां देंगे। अगले तीन से चार महीनों में इससे संबंधित करार पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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