राजा पर सोमवार को हो सकता है फैसला

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आरोपों से घिरे केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर सोमवार को कुछ फैसला हो सकता है। इस दिन राजा के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई जहां सर्वोच्च न्यायलय करेगा, वहीं कांग्रेस संसद में बयान देगी।राजा मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने रविवार को बैठक की, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने राजा के इस्तीफे से इंकार किया है।

विपक्षी पार्टियों द्वारा पिछले सप्ताह संसद ठप्प करने की धमकियों के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।सरकार पर विपक्षी पार्टियां वर्ष 2008 में हुए 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में आरोपी राजा के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा रही हैं। पार्टियों का दावा है कि इस आवंटन में एक लाख 77 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) गत बुधवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है "कुछ चुनिंदा कंपनियों को आवंटन का फायदा पहुंचाने के लिए राजा ने अनुचित और लचीली प्रक्रिया अपनाई। "इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं की अनौपचारिक बैठक संसद भवन में हुई। नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी शामिल हुए।

नई दिल्ली में एक समारोह से इतर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा की संलिप्तता के संबंध में कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो कुछ भी कहना है वह संसद में कहेंगे।कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में यह राय थी कि राजा को मंत्रिमंडल में रहने देने का फैसला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर छोड़ देना चाहिए। पार्टी आलाकमान ने राजा के उस बयान पर भी विचार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मोबाइल नम्बर पोर्टबिलिटी के प्रस्तावित प्रावधान को लेकर विरोधी खेमा उन्हें निशाना बना रहा है।

राजा कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के सांसद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने वित्त और कानून मंत्रालय के सुझावों को ताक पर रखते हुए 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया। इससे सरकार को 170,000 करोड़ रुपये की चपत लगी।उधर, इस मामले में विपक्षी पार्टियों द्वारा राजा को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) झुकने को तैयार नहीं है।

डीएमके सूत्रों ने बताया कि पार्टी राजा के समर्थन में है और वह अन्य सहयोगियों के हितों की रक्षा करते हुए गठबंधन राजनीति की जिम्मेदारी निभाना जानती है।नाम उजागर न करने की शर्त पर डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि पार्टी अभी भी अपने पुराने रुख पर कायम है। पार्टी राजा का समर्थन करती है।

उधर, रविवार को डीएमके के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने राजा और सांसद टी.आर. बालू से मुलाकात की।डीएमके के एक पदाधिकारी ने बताया, "विपक्षी पार्टियों ने धमकी दी है कि यदि राजा को उनके पद से नहीं हटाया जाता तो वे सोमवार को संसद की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। यह सरकार को ब्लैकमेल करने का तरीका है।"

उन्होंने कहा कि डीएमके गठबंधन के धर्म को निभाना जानती है। राजा को हटाने के लिए कांग्रेस पर काफी दबाव डाला जा रहा है। संकट आने पर लोगों की नहीं पार्टी के हित की बात सोची जाएगी।पदाधिकारी ने कहा यदि वर्तमान समय में राजा को हटाया जाता है तो ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) इसे अपनी जीत के रूप में लेगी।उधर, डीएमके सूत्रों ने बताया कि राजा पर लगे आरोपों के चलते पार्टी को अगले साल विधानसभा चुनाव में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

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