सरकार ने कहा, 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कोई घोटाला नहीं (लीड-1)

केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को दायर किए गए हलफनामे में जनहित याचिका केंद्र (सीपीआईएल) द्वारा दायर उस याचिका का विरोध किया गया है जिसमें कहा गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल द्वारा कराई जाए।

हलफनामे में कहा गया, "वर्ष 2007-08 में आवंटन (2जी आवंटन) की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और नीतियों के अनुरूप थी।"

दूरसंचार विभाग के सहायक महानिदेशक सीता राम मीणा द्वारा दायर किए गए हलफनामे में कहा गया कि न्यायालय द्वारा जांच प्रक्रिया का नियंत्रण ऐसी विशेष परिस्थितियों में किया जाता है जब इस बात की आशंका हो कि जांच सही तरीके से संचालित नहीं हो सकती।

सरकार ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम की कीमतें कार्यपालिका का नीतिगत विषय है जिसमें न्यायपालिका को समीक्षा का अधिकार नहीं है।

हलफनामे में कहा गया कि यह कहना पूरी तरह से गलत है कि 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सलाह की अवहेलना करके दिए गए।

इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री ने 2 नवम्बर 2007 को अपने पत्र के जरिए कुछ मुद्दों पर सवाल पूछे थे जिनका जवाब दूरसंचार मंत्री ने उसी दिन दे दिया था।

हलफनामे में कहा गया, "इसके बाद इस संबंध में किसी तरह की बातचीत का कोई संदर्भ प्राप्त नहीं हुआ है और दो मंत्रियों के बीच कोई मतभेद नहीं है।"

अक्षम कम्पनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन के आरोप को खारिज करते हुए हलफनामे में कहा गया कि आवंटन 14 दिसंबर 2005 को जारी किए गए नीति-निर्देशों के आधार पर किया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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