अशोक चव्हाण से इस्तीफ़ा देने को कहा

अशोक चव्हाण कई बार कह चुके हैं कि उनका इस विवाद से कोई लेना देना नहीं है हालांकि उन्होंने माना है कि उनके रिश्तेदारों के इस सोसाइटी में मकान थे. सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है.मंगलवार से ही संसद सत्र शुरु हो रहा है और इस मुद्दे को लेकर हंगामा होने के पूरे आसार जताए जा रहे हैं. सत्र शुरु होने से कुछ घंटे पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को इस्तीफ़ा देने के लिए कह दिया गया है.
तीस अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात करने के बाद चव्हाण ने इस्तीफ़े की पेशकश की थी.मुंबई के महंगे कोलाबा इलाक़े में स्थित 31-मंज़िला आदर्श नगर सोसाईटी के बारे में कहा जा रहा है कि ये ज़मीन पूर्व सैनिकों और युद्ध में मारे गए लोगों की विधवाओं के लिए थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों ने इस ज़मीन को हड़पकर इमारत खड़ी कर दी है.इसमें पूर्व सेनाध्यक्षों के अलावा कई राजनीतिज्ञ भी रहते हैं.
विवाद
यहाँ रहने वाले लोगों में पूर्व सेनाध्यक्ष एनसी विज, दीपक कपूर, पूर्व जलसेनाध्यक्ष ऐडमिरल माधवेंद्र सिंह जैसे लोगों के नाम लिए जा रहे हैं.आरोप है कि इस इमारत को बनाने के लिए कई नियमों का उल्लंघन किया गया था- मसलन इमारत की मात्र छह मंज़िलें बननी थीं लेकिन नियमों को ताक़ पर रखकर इसे 31-मंज़िला बना दिया गया.
पर्यावरण मंत्रालय कह चुका है कि उसने सोसाइटी को कोई क्लियरेंस नहीं दी थी.अब बहस इस बात पर है कि ये ज़मीन सेना की है या नहीं.अशोक चव्हाण का कहना है कि ज़मीन सरकार की है , ख़ासकर राजस्व विभाग की. उनका कहना था कि जब ज़मीन सोसाइटी को दी गई थी तब वो मुख्यमंत्री नहीं थे.












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